Period pains सभी महिलाओं के लिए एक common problem है जो उनके रोज़मर्रा के काम करना भी मुश्किल कर देता है।आज हम आपको बताने वाले कुछ आसान और असरदार घरेलू उपाय, जो आपको period pain से राहत दिलाने में मदद करेंगी।1. गर्म पानी से नहाना। गर्म पानी से हमारी muscles की जकड़न कम होती है और body को relaxed feel होता है। साथ ही गर्म पानी blood circulation को भी बेहतर बनाता है, जिससे पेट और कमर का दर्द धीरे-धीरे कम हो जाता है। अगली बार जब भी आपको period pain हो, तो आप ये hot shower ज़रूर try करें।2. गर्म पानी की बोतल या heating pad से सिकाई करना। Heating pad को हल्के तौलिये में लपेटकर अपने पेट पर रखें। Heating pad की गर्मी से muscles relax होती हैं, जिसके कारण period cramps धीरे-धीरे कम होने लगते है। तो ये easy trick ज़रूर अपनाएँ!3. अगर दर्द ज़्यादा हो रहा है, तो हल्की मालिश भी मददगार हो सकती है। मालिश करने से शरीर में endorphin नाम का hormone release होता है, जो एक natural painkiller की तरह काम करता है! यह आपके stress को कम करके आपको आराम दिलाता है। तो अगली बार, periods के दौरान हल्की मालिश करना ना भूलें।4. exercise! Yoga, walking, cycling, या swimming करने से blood circulation बेहतर होता है और period pain कम होता है। साथ ही, exercise करने से endorphin release होता है, जिससे periods के दौरान आपका mood भी अच्छा रहता है।अगर दर्द बहुत ज़्यादा हो, तो doctor से consult करके आप paracetamol या ibuprofen जैसी दवाएं भी ले सकते हैं। ये दर्द और सूजन को कम करने में मदद करती हैं। ये दवाएं आपके शरीर के उन chemicals को भी कम करती हैं, जो दर्द और ऐंठन का कारण बनते हैं।इन tips को try करें और किस tip से आपको सबसे ज्यादा आराम मिला है ये हमें comments में ज़रूर बताएँ।Source:- 1. https://www.nhs.uk/conditions/period-pain/2. https://www.nhs.uk/conditions/periods/period-problems/3. https://www.bupa.co.uk/newsroom/ourviews/natural-remedies-period-pain4. https://www.webmd.com/women/menstrual-pain5. https://www.webmd.com/women/ss/slideshow-get-rid-of-cramps
हमारे पिछले वीडियो में हमने Dyslexia के बारे में बात की थी: Dyslexia क्या है, यह कैसे होता है और यह कितना खतरनाक हो सकता है। आज के वीडियो में हम बात करेंगे की Dyslexia को कैसे diagnose किया जा सकता है। Dyslexia से जूझ रहे लोग अक्सर अपनी परेशानी को manage करने के तरीके खोज लेते हैं, इसलिए वो किस परेशानी से जूझ रहे हैं ये कई बार लोग समझ ही नहीं पाते हैं। किसी से भी share न करना शर्मिंदगी से तो बचा सकता है, लेकिन लोगों से बात करके सही मदद मिल जाने पर स्कूल का सफर और पढ़ाई करना आसान हो सकता है।Dyslexia का पता ज़्यादातर तो बचपन में ही लग जाता है लेकिन कई बार Adolescence और adulthood में भी dyslexia का diagnose होता हैं।किसी को adolescent age में Dyslexia है या नहीं, इसका पता इन कुछ लक्षणों से लगाया जा सकता है:समझदार होने के बावजूद भी सही से ना पढ़ (read) पानाSpelling एंड writing skills का कमजोर होनासमय पर assignments और tests ख़त्म ना कर पानाचीजों का सही नाम न याद रख पानाLists और phone numbers याद न रख पानादाएं - बाएं याद रखने में या नक्शा पढ़ने में मुश्किल होनाविदेशी भाषा समझने में परेशानीइनमें से किसी भी एक लक्षण के होने से यह नहीं पता लग सकता की व्यक्ति को Dyslexia की problem है। लेकिन अगर एक व्यक्ति में इनमें से कुछ लक्षण दिखते हैं तो उसका Dyslexia का test करवा लेना चाहिए।स्कूल में या community में कोई psychologist या reading specialist इस condition को evaluate करके formally Dyslexia का पता लगा सकता है।जितनी छोटी उम्र में Dyslexia का पता लग सके उतना ही अच्छा है।Source:-1. https://www.nhs.uk/conditions/menopause/2. https://www.cuh.nhs.uk/rosie-hospital/menopause-and-perimenopause/signs-and-symptoms/3. https://www.nhs.uk/conditions/menopause/symptoms/4. https://www.webmd.com/menopause/guide-perimenopause5. https://www.webmd.com/menopause/ss/slideshow-signs-perimenopause
क्या आपके periods irregular हो रहे हैं? क्या आपको कभी-कभी mood swings होते हैं?अगर हाँ, तो हो सकता है कि आप Perimenopause के दौर से गुजर रहे हो!Perimenopause होता क्या है?सीधे शब्दों में कहें, तो यह वह समय होता है जब आपका शरीर menopause की ओर बढ़ने लगता है। इस दौरान, आपकी ovaries (अंडाशय) estrogen और progesterone hormones को बनाना कम कर देती हैं।इसका असर सबसे पहले आपके periods (मासिक धर्म) पर पड़ता है। Perimenopause की वजह से periods कभी जल्दी आ जाते हैं, कभी देर से आते हैं, तो कभी अचानक ही बंद हो जाते हैं!Perimenopause को लेकर अब भी सवाल हैं? Ask Medwiki पर पाएं भरोसेमंद और verified sources से सही जानकारी।Perimenopause कब शुरू होता है?अधिकतर महिलाओं में Perimenopause 40 की उम्र के आसपास शुरू होता है, लेकिन कुछ महिलाओं में यह 30 साल की उम्र में भी शुरू हो सकता है और कुछ में 50 के बाद।एक बहुत बड़ा सवाल जो अक्सर महिलाओं के मन में आता है कि - क्या Perimenopause के दौरान Pregnancy Possible है?जवाब है – हाँ! जब तक आपके periods पूरी तरह से बंद नहीं होते, तब तक pregnant होना possible है।Perimenopause के लक्षण क्या होते हैं?Perimenopause के दौरान आपके शरीर में कई बदलाव हो सकते हैं, जैसे -Periods का irregular हो जाना।कभी ज्यादा तो कभी बहुत कम bleeding होना।Mood swings – कभी बहुत खुश तो कभी बहुत उदास महसूस करना।Hot flashes यानी अचानक गर्मी महसूस करना।रात में पसीना आना।Vagina में सूखापन (dryness) होना।बार-बार पेशाब (urine) करने की इच्छा होना।नींद न आना या बहुत थकान महसूस करना।Perimenopause के समय शरीर में हो रहे बदलावों का असर mental health पर भी पड़ सकता है।कई महिलाएं चिंता, घबराहट और depression महसूस कर सकती हैं।कभी-कभी छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना भी आम बात है।अगर आपको ऐसा महसूस हो रहा है, तो अपने परिवार वालों से इस बारे में बात करें और जरूरत पड़े तो doctor की सलाह भी लें।Source:- 1. https://www.nhs.uk/conditions/menopause/2. https://www.cuh.nhs.uk/rosie-hospital/menopause-and-perimenopause/signs-and-symptoms/3. https://www.nhs.uk/conditions/menopause/symptoms/4. https://www.webmd.com/menopause/guide-perimenopause5. https://www.webmd.com/menopause/ss/slideshow-signs-perimenopause
5 ऐसे foods के बारे में, जो periods के दौरान होने वाली तकलीफ़ों को कम कर सकते हैं।1.अदरक! अदरक में gingerol नाम का compound होता है, जिसमें anti-inflammatory properties होती है। ये period pain को कम करने में मदद करता है और शरीर की थकान को भी दूर करता है। इसलिए अगर आपको period cramps हो रहे हैं, तो अदरक की चाय या उसका टुकड़ा पानी में उबालकर ज़रूर पिएँ।2. हल्दी! इसमें curcumin नाम का एक compound होता है, जो शरीर की सूजन को कम करता है और blood flow को भी improve करता है। हल्दी वाला दूध पीने से आपको period pain में काफ़ी आराम मिल सकता है। अगर आपको हल्दी वाला दूध पसंद नहीं है, तो आप हल्दी को गर्म पानी में मिलाकर भी पी सकते हैं!3. गुड़ के बारे में! Periods के दौरान शरीर में iron की कमी हो सकती है, जिससे कमजोरी और थकान महसूस होती है। गुड़ iron का एक बेहतरीन source है, जो आपके शरीर में haemoglobin बढ़ाता है और आपको energy देता है। इसलिए गुड़ का एक छोटा टुकड़ा रोज़ खाएं।अगर आपको periods के दौरान बहुत सुस्ती और सिरदर्द होता है, तो4. coffee ज़रूर try करें! इसमें caffeine नाम का एक organic compound होता है, जो आपको active रखता है और सिरदर्द को कम करता है। लेकिन बहुत ज्यादा coffee भी ना पिएं, क्योंकि इससे शरीर में पानी की कमी हो सकती है!5. आंवला में Vitamin C, iron और antioxidants होते हैं, जो शरीर की सूजन और खून की कमी को कम करने में मदद करते हैं। इसमें मौजूद flavonoids और tannins मांसपेशियों को आराम देकर ऐंठन (cramps) भी कम करते हैं। आप इसे कच्चा, जूस या आंवला पाउडर के रूप में खा सकते हैं।Source:- 1. https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC8021506/2. https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC10935160/3. https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/29526236/4. https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC4962155/5. https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/37373663/
Vagina से White discharge या सफेद पानी आजकल औरतों में एक आम समस्या बन गई है। यह hormonal changes, infections, या किसी और health issue की वजह से हो सकता है।सफ़ेद पानी को लेकर अब भी सवाल हैं? Ask Medwiki पर पाएं भरोसेमंद और verified sources से सही जानकारी।सफ़ेद पानी से छुटकारा पाने के 4 आसान तरीके:Cotton के थोड़े ढीले underwears पहनें। ज़्यादा Tight underwear पहनने से शरीर में गर्मी और नमी trap हो जाती है, जिसकी वजह से vagina में bacteria और yeast पैदा हो सकता है, और white discharge की problem बढ़ सकती है। Cotton का fabric, vagina के आस पास के area को dry रखने और air circulation में मदद करता है।Hygiene maintain करें। अपने vaginal area को हर दिन पानी से धोएं। ध्यान रखें कि vagina के अंदर कोई भी साबुन, deodorants या sprays का इस्तेमाल ना करें, क्योंकि साबुन के chemicals vagina को irritate कर सकते है और white discharge का कारण भी बन सकते है।ऐसी vaginal creams/gels use करें जिनमें curcumin या aloe vera होता है क्योंकि हल्दी में मौजूद curcumin नाम के compound और aloe vera में anti-inflammatory और antifungal properties होती है जो उन infections से लड़ती है जिनकी वजह से white discharge हो सकता है।Sex करते वक्त हमेशा condom का इस्तेमाल करें। Condoms STIs यानी sexually transmitted infections से बचाता है जो white discharge का कारण बन सकते हैं। Sexually transmitted infections की regular screening करवाना भी white discharge से बचने में मददगार हो सकता है।इन simple tips को follow करें और अपनी white discharge की समस्या से छुटकारा पाएं।Source:- 1. https://www.webmd.com/women/vaginal-discharge-whats-abnormal2. https://my.clevelandclinic.org/health/symptoms/4719-vaginal-discharge3. https://www.nhs.uk/conditions/vaginal-discharge/4. https://www.nhs.uk/conditions/vaginitis/5. https://www.nhsinform.scot/illnesses-and-conditions/sexual-and-reproductive/vaginal-discharge/
पीरियड्स अपने साथ कई तरह के बदलाव लाते हैं। इसमें दर्द, थकान और शारीरिक असहजता तो शामिल होती ही है, लेकिन भावनात्मक उतार–चढ़ाव कई लोगों के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा बन जाता है। मूड स्विंग्स अक्सर बिना चेतावनी के आते हैं, अलग-अलग समय तक रहते हैं और आत्मविश्वास से लेकर रिश्तों तक, लगभग हर चीज़ को प्रभावित कर सकते हैं।क्योंकि समाज में इस विषय पर खुलकर बात नहीं होती, कई लोग इन भावनात्मक बदलावों को अपने स्वभाव से जोड़ देते हैं, जबकि असल में यह शरीर की जैविक प्रक्रिया का हिस्सा है।यह ब्लॉग पीरियड्स के दौरान होने वाले भावनात्मक बदलावों के कारण, उनके प्रभाव और उनसे निपटने के आसान तरीकों पर प्रकाश डालता है। चाहे आप खुद इन परिवर्तनों से गुजर रहे हों या किसी और का साथ देना चाहते हों—थोड़ी समझ चीजों को काफी आसान बना सकती है।पीरियड्स से पहले और दौरान भावनाएँ क्यों बदलती हैं?हमारे शरीर में होने वाले हार्मोन केवल शारीरिक प्रक्रियाओं को ही नहीं, बल्कि भावनाओं को भी प्रभावित करते हैं।पीरियड शुरू होने से ठीक पहले एस्ट्रोजन का स्तर कम होने लगता है औरप्रोजेस्टेरोन बढ़ जाता है। यह बदलाव दिमाग में मौजूद उन रसायनों को प्रभावित करता है जो मूड को नियंत्रित करते हैं।सबसे महत्वपूर्ण रसायन है—सेरोटोनिन, जो खुशी, सुकून और स्थिरता बनाए रखने में मदद करता है।जब हार्मोनल बदलावों के कारणसेरोटोनिन घटता है, तो:चिड़चिड़ापन बढ़ जाता हैछोटी बातें बड़ी लगने लगती हैंमूड बिना कारण गिर जाता हैमन बेचैन और भारी महसूस होता हैसाथ ही, थकान, क्रैम्प्स और शरीर में दर्द भी भावनात्मक क्षमता को कमजोर कर सकते हैं। जब शरीर थका हुआ हो, मन भी जल्दी निराश हो जाता है।दैनिक जीवन में मूड स्विंग्स कैसे महसूस होते हैं?हर व्यक्ति के अनुभव अलग हो सकते हैं, लेकिन कुछ सामान्य भावनात्मक बदलाव अक्सर दिखाई देते हैं। ये बदलाव पीरियड शुरू होने से कुछ दिन पहले दिखाई दे सकते हैं या शुरुआती दिनों तक जारी रह सकते हैं।सामान्य अनुभव हो सकते हैं:ध्यान केंद्रित करने में कठिनाईजल्दी गुस्सा या झुंझलाहटअचानक मन का खाली या उदास महसूस होनाकिसी से बात करने का मन न करनाछोटी बातों से भी भावनात्मक चोट लगनाबिना कारण रोने का मनकिसी भी काम के लिए मोटिवेशन का कम होनाकुछ लोगों के लिए ये बदलाव हल्के होते हैं, लेकिन कई लोगों के लिए यह भावनात्मक लहर बहुत भारी भी महसूस हो सकती है। इससे दैनिक काम, रिश्तों और पढ़ाई–काम की क्षमता तक प्रभावित होती है।वह मनोवैज्ञानिक पक्ष जिसे लोग अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैंसमस्या यह नहीं है कि मूड स्विंग्स होते हैं—समस्या यह है कि समाज इसे कैसे देखता है।कई बार लोगों को सिखाया जाता है कि पीरियड्स या भावनाओं पर बात करना कमजोरी की निशानी है। नतीजा? जब कोई व्यक्ति इन भावनात्मक परिवर्तनों से गुजरता है, तो उसे लगता है कि वह बेवजह भावुक, नाटकिया या कमज़ोर है।यह चुप्पी अपराधबोध और शर्म पैदा कर देती है। लोग अपनी भावनाओं को दबाने लगते हैं और बिना सहायता के सब झेलने की कोशिश करते हैं। समय के साथ यह भावनात्मक थकान बढ़ा सकती है।सच्चाई यह है:ये भावनाएँ किसी की कमजोरी नहीं, बल्कि एक प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया की प्रतिक्रिया होती हैं। इसे समझना और स्वीकार करना मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद आवश्यक है।जब भावनात्मक बदलाव सामान्य से अधिक गहरे लगने लगेंअधिकतर मूड स्विंग्स हार्मोनल बदलावों से जुड़े होते हैं और सामान्य माने जाते हैं।लेकिन कुछ लोगों में लक्षण बहुत तीव्र हो सकते हैं। उदाहरण के लिए:PMS (Premenstrual Syndrome)PMDD (Premenstrual Dysphoric Disorder) – जो PMS का गंभीर रूप हैइन स्थितियों में भावनात्मक बदलाव इतने ज्यादा हो सकते हैं कि वे रोजमर्रा की जिंदगी को बाधित कर देते हैं।यदि इनमें से कोई बात महसूस हो, तो सहायता लेना ज़रूरी है:लगातार गहरी उदासीखुद को नुकसान पहुँचाने के विचारअत्यधिक गुस्साकिसी भी चीज़ में रुचि का खत्म हो जानाबार-बार भावनात्मक टूटनापढ़ाई, काम या रिश्ते संभालना मुश्किल होनासामाजिक रूप से पूरी तरह दूर हो जानाऐसी परिस्थितियाँ सिर्फ साधारण मूड स्विंग्स नहीं होतीं—ये संकेत हैं कि आपको भावनात्मक या मेडिकल सहायता की जरूरत है।भावनात्मक बदलावों को संभालने के व्यावहारिक तरीकेमूड स्विंग्स का कारण भले ही जैविक हो, लेकिन कुछ आसान आदतें इन्हें संतुलित रखने में काफी मदद कर सकती हैं।1. शरीर की सुनें, उससे लड़ें नहींशरीर जब थका हो तो उसे आराम देना कमजोरी नहीं, देखभाल है।थोड़ा सा आराम, छोटी-सी नींद, या शांत बैठकर सांस लेना भी मन को हल्का कर देता है।2. ऐसा भोजन चुनें जो हार्मोनल संतुलन को सहयोग देंकुछ खाद्य पदार्थ मूड को स्थिर रखने में मदद करते हैं, जैसे:मेवे और बीजसाबुत अनाजमौसमी फल–सब्जियाँअंडा, दही या दाल जैसे प्रोटीनथोड़ा सा डार्क चॉकलेटबहुत ज्यादाकैफीन या मीठी चीजें अचानक ऊर्जा गिराकर मूड को और खराब कर सकती हैं।3. पानी की मात्रा बढ़ाएँसिर्फ पानी पीने से भी सिरदर्द, थकान और भारीपन कम होता है।जब शरीर हल्का महसूस करता है, मन भी शांत रहता है।4. हल्की शारीरिक गतिविधियाँतेज़ एक्सरसाइज़ हमेशा संभव नहीं होती, लेकिन हल्का मूवमेंट काफी राहत देता है:टहलनाहल्का स्ट्रेचिंगधीमा योगकमरे में आराम से नाचनाये गतिविधियाँ शरीर में ऐसे प्राकृतिक रसायन रिलीज़ करती हैं जो मूड को बेहतर बनाते हैं और दर्द कम करते हैं।5. तनाव को बढ़ने से पहले ही संभालेंतनाव और मूड स्विंग्स जब मिल जाते हैं, तो स्थिति और कठिन हो जाती है।छोटी आदतें भी तनाव कम करने में मदद करती हैं:गहरी साँसेंप्रकृति के बीच समयशांत संगीतडायरी लिखनाभरोसेमंद व्यक्ति से बात करनाइनमें पूर्णता की जरूरत नहीं—बस नियमितता मायने रखती है।6. भावनात्मक सीमाएँ बनाना सीखेंमुश्किल दिनों में किसी बातचीत या काम को टालना गलत नहीं है।“ना” कहना, बिना अपराधबोध के, मानसिक ऊर्जा को बचाता है।7. भावनात्मक पैटर्न को ट्रैक करेंडायरी या मोबाइल ऐप में हर महीने के भावनात्मक बदलाव लिखने से पैटर्न समझ आता है।जब आप जानते हैं कि ये भावनाएँ कब आती हैं, तो आप मानसिक रूप से तैयार रहते हैं।किसी ऐसे व्यक्ति का समर्थन कैसे करें जो इन बदलावों से गुजर रहा होमूड स्विंग्स का सामना कर रहे व्यक्ति को सबसे ज्यादा जरूरत होती है—समझ, सहानुभूति और सम्मान की।आप इन तरीकों से मदद कर सकते हैं:आराम करने के लिए प्रोत्साहित करेंउनकी भावनात्मक जगह का सम्मान करेंबिना टोके ध्यान से सुनेंछोटे-छोटे कामों में मदद करेंजज करने वाले वाक्यों से बचें“यह तो बस पीरियड है” जैसे कमेंट न करेंकभी-कभी सिर्फ शांत उपस्थिति भी किसी को सुरक्षित और समझा हुआ महसूस कराती है।चक्र के दौरान सकारात्मक माहौल कैसे बनाया जाए?हमारी भावनाओं पर वातावरण का बड़ा प्रभाव होता है।कुछ छोटे-छोटे बदलाव मानसिक बोझ हल्का कर सकते हैं:साफ और आरामदायक बिस्तरहल्की सुगंधआरामदायक कपड़ेकम या मुलायम रोशनीपसंदीदा संगीतयह माहौल मन को स्थिर और शांत बनाने में मदद करता है।जब भावनाएँ विकास का साधन बन जाती हैंदिलचस्प बात यह है कि पीरियड्स के दौरान बढ़ी हुई भावनात्मक संवेदनशीलता हमें खुद को समझने में मदद कर सकती है।इस समय मन उन बातों को सामने लाता है जिन्हें हम आम दिनों में नज़रअंदाज़ कर देते हैं।आप इस समय अपने बारे में कई बातें समझ सकते हैं:छुपा हुआ तनावअधूरी भावनात्मक जरूरतेंरिश्तों या दिनचर्या में सुधार की जगहवे सीमाएँ जिन्हें आपको मजबूत करना चाहिएइस तरह, यह भावनात्मक लहर सिर्फ चुनौती नहीं होती—कभी-कभी यह आत्मचिंतन का मौका भी बन जाती है।निष्कर्षपीरियड्स के दौरान होने वाले मूड स्विंग्स किसी की भावुकता या कमजोरी का प्रमाण नहीं हैं।ये शरीर में हो रहे प्राकृतिक बदलावों की प्रतिक्रिया हैं।जब हम इन भावनाओं को समझते हैं, उनका सम्मान करते हैं और उनके बारे में खुलकर बात करते हैं—तो यह सफर आसान हो जाता है। अपने शरीर को समझना आत्मविश्वास देता है।दूसरों की भावनाओं का सम्मान रिश्तों को मजबूत बनाता है। और समाज में इस विषय पर खुलापन बढ़ता है, तो लोग खुद को कम अकेला महसूस करते हैं।पीरियड्स केवल शारीरिक प्रक्रिया नहीं हैं—यह एक भावनात्मक यात्रा है, जिसे प्यार, समझ और धैर्य की जरूरत होती है।अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)1. पीरियड्स के दौरान मूड स्विंग्स क्यों होते हैं?हॉर्मोनल बदलाव, खासकर एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के उतार-चढ़ाव, सेरोटोनिन को प्रभावित करते हैं, जिससे मूड बदलता है।2. क्या सभी को समान मूड स्विंग्स होते हैं?नहीं। हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है। किसी को हल्के बदलाव महसूस होते हैं, किसी को तीव्र।3. ये मूड स्विंग्स कितने दिनों तक रहते हैं?आमतौर पर पीरियड शुरू होने से कुछ दिन पहले और शुरुआती दो-तीन दिन तक।4. क्या खान-पान का असर पड़ता है?हाँ। पौष्टिक भोजन मूड को स्थिर रखता है और अचानक होने वाले गिरावट को रोकता है।5. कब डॉक्टर से मिलना चाहिए?जब भावनाएँ रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगें, अत्यधिक उदासी हो, या खुद को नुकसान पहुँचाने के विचार आने लगें।6. क्या व्यायाम मदद करता है?हल्की गतिविधि जैसे टहलना या योग मूड बेहतर करती है और दर्द कम करती है।7. क्या ज्यादा भावुक होना सामान्य है?हाँ, यह पूरी तरह सामान्य है और शरीर की प्राकृतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा है।Disclaimer:यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी प्रकार की गंभीर भावनात्मक या शारीरिक समस्या होने पर विशेषज्ञ से सलाह ज़रूर लें।
क्या आपको पता है कि भारत में हर 22 में से 1 शहरी महिला को स्तन कैंसर होने का खतरा रहता है?लेकिन चिंता मत कीजिए, आप घर पर ही स्तन की जांच करके स्तन कैंसर के शुरुआती लक्षणों का पता लगा सकती हैं।तो चलिए जानते हैं कि आप घर पर कैसे स्तन कैंसर की जांच कर सकती हैं:एक सही समय चुनें : यह जांच आप अपने पीरियड्स के कुछ दिन बाद करें, जब आपके स्तन कम नरम हो। अगर आपके पीरियड्स बंद हो चुके हैं, तो हर महीने एक ही दिन पर यह जांच करें।आईने के सामने जांच करें: आईने के सामने खड़े हो कर अपने स्तन के शेप या साइज़ में कोई बदलाव देखने की कोशिश करें। स्किन में बदलाव, रेडनेस, और सूजन की जांच करना भी बेहद ज़रूरी है!हाथों को ऊपर उठाएं : अब दोनों हाथ अपने सिर के ऊपर उठाएं और देखें कि जब हाथ उठते हैं, तब आपके स्तनों में कोई बदलाव तो नहीं आ जाते हैं। अगर कुछ अलग दिखे, तो डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।गांठों की जांच करें:अपनी उंगलियों का इस्तेमाल करके अपने स्तनों को धीरे से दबाएं। उंगलियों को घुमाते हुए, स्तन के बाहरी हिस्से से निप्पल तक जाएं। निप्पल और कॉलरबोन के आस-पास अलग-अलग तरीके से प्रेशर डालते हुए, गांठों या मोटी त्वचा की जांच करें।निप्पल की जाँच करें:दोनों निप्पल को धीरे से दबाएं। अगर खून या कोई डिस्चार्ज निकले, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।बगलों की जांच करना न भूलें: अपनी बगलों को न भूलें, क्योंकि स्तन का टिश्यू वहां तक फैला होता है। अगर आपको कोई बदलाव महसूस हो, तो डॉक्टर के पास जाना न भूलें।अगर आपको कुछ अलग दिखे, तो बेझिझक डॉक्टर होकर से बात करें। सुरक्षित रहें, और अपनी सेहत का ध्यान रखें।Source:-1. https://cancerindia.org.in/breast-cancer/ 2. https://www.indiancancersociety.org/breast-cancer/index.html
PCOD/PCOS की वजह से, India में बहुत सी औरतें irregular periods, weight gain, और hormone imbalances जैसी problems face करती हैं।लेकिन इन problems को जड़ से खतम करने के लिए कुछ easy तरीके भी है। Article को end तक पढ़िए और एक bonus नुस्ख़े के बारे में जानिए।यह हैं 5 घरेलु नुस्ख़े PCOD/PCOS को जड़ से ख़त्म करने के लिए:सहजन के पत्ते (Moringa Leaves): यह hormones को balance करने और insulin resistance को कम करने में मदद करते हैं, जो PCOS का एक common कारण होता है। यह blood sugar को 25% तक कम भी कर सकता हैं, जो PCOS की वजह से होता है। आप सहजन के पत्तों के powder को चाय में डाल कर अपनी health को boost कर सकते हो।पहाड़ी पुदीने की चाय (Spearmint Tea): कुछ आरामदायक चाहिए? यह चाय औरतों के high testosterone levels को कम करने में मदद करती है, जो PCOS में acne, unwanted hair growth, और irregular periods का कारण होता है। रोज़ 2 cups पहाड़ी पुदीने की चाय को पीने से PCOS के symptoms 40-50% तक reduce हो सकते हैं।सेब का सिरका (Apple Cider Vinegar): आपने शायद सुना होगा कि यह weight loss के लिए अच्छा होता है, लेकिन क्या आपको पता है कि सेब का सिरका PCOS को ठीक करने में भी useful है? यह weight और hormone को balance करने के लिए भी काफ़ी अच्छा होता है।अश्वगंधा (Ashwagandha): अश्वगंधा एक आयुर्वेदिक herb है जो आपको stress कम करने में मदद करता है। यह cortisol levels को reduce करता है, जो PCOS के कारण high हो जाते हैं।मेथी के बीज (Fenugreek Seeds): मेथी के बीज सिर्फ़ खाने के लिये ही नहीं, बल्कि PCOS को कम करने के लिए भी असरदार होते हैं। इन्हें रात भर भिगोकर सुबह खाने से blood sugar levels कम हो सकते है और periods भी regular बन सकता है।Bonus नुस्ख़ा: दालचीनी (Cinnamon) – यह एक common spice है जो PCOS के symptoms को control करने में मदद करता है। यह periods को regulate करने, hormones को balance करने, और insulin resistance को कम करने में useful होता है। सिर्फ एक चम्मच दालचीनी अपनी में डाल कर आप अपने health में बड़ा फर्क ला सकते हो।इन घरेलू नुस्ख़ों को अपने daily routine में शामिल करके, आप PCOD और PCOS के symptoms को कम कर सकते हो।क्या आपने इनमें से कोई नुस्ख़ा try कीया है? अगर नहीं, तो अभी try करके देखिएSource:-1. https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC9745082/ 2. https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/23666047/ 3. https://pib.gov.in/Pressreleaseshare.aspx?PRID=1893279
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