सिरदर्द औरमाइग्रेन अब केवल कुछ लोगों तक सीमित समस्याएं नहीं रह गई हैं। लंबे समय तक स्क्रीन पर काम करना, अनियमित नींद, तनाव, भोजन छोड़ना और लगातार मानसिक दबाव ने सिर के दर्द को कई वयस्कों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बना दिया है। ऐसी स्थितियों में डॉक्टर अक्सर ऐसी कॉम्बिनेशन दवाएं लिखते हैं जो दर्द और उसके मूल कारणों दोनों पर काम करती हैं। ऐसी ही एक व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली दवा हैनैक्सडॉम 500 टैबलेट। यह ब्लॉग विस्तार से बताता है कि यह दवा कैसे काम करती है, किन स्थितियों में दी जाती है, इसके फायदे, संभावित साइड इफेक्ट्स और इसे इस्तेमाल करने से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।यह लेख आपको इस दवा को सरल लेकिन परिपक्व तरीके से समझाने के उद्देश्य से लिखा गया है, बिना किसी बढ़ा चढ़ाकर किए गए दावों या जटिल मेडिकल भाषा के।नैक्सडॉम 500 टैबलेट क्या हैनैक्सडॉम 500 एक प्रिस्क्रिप्शन दवा है, जिसे आमतौर पर मध्यम से गंभीर सिरदर्द, खासकर माइग्रेन से जुड़े दर्द के लिए दिया जाता है। यह एक कॉम्बिनेशन टैबलेट है जोसूजन को कम करने, दर्द के संकेतों को नियंत्रित करने और माइग्रेन के दौरान होने वाले रक्त वाहिकाओं से जुड़े बदलावों को सुधारने का काम करती है।डॉक्टर इसे तब सलाह देते हैं जब सामान्य पेनकिलर से राहत न मिले या जब माइग्रेन के लक्षण बार बार और ज्यादा तीव्र हो जाएं। यह बिना डॉक्टर की सलाह के रोजाना या हल्के दर्द के लिए लेने की दवा नहीं है।शरीर में नैक्सडॉम 500 कैसे काम करता हैइस दवा की उपयोगिता समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि सिरदर्द और माइग्रेन कैसे होते हैं। माइग्रेन के दौरान दिमाग की रक्त वाहिकाएं फैल जाती हैं और कुछ रासायनिक तत्व दर्द, मितली और रोशनी व आवाज के प्रति संवेदनशीलता पैदा करते हैं। सरल शब्दों में, दिमाग जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया देने लगता है।नैक्सडॉम 500 इन प्रतिक्रियाओं को शांत करने में मदद करता है। यह रक्त वाहिकाओं के आसपास की सूजन को कम करता है, दर्द पैदा करने वाले केमिकल्स को ब्लॉक करता है और रक्त प्रवाह को संतुलित करता है। यही संयुक्त प्रभाव इसे माइग्रेन अटैक और जिद्दी सिरदर्द दोनों में प्रभावी बनाता है।रोजमर्रा की मेडिकल प्रैक्टिस में नैक्सडॉम 500 टैबलेट का उपयोगडॉक्टर इस दवा को मुख्य रूप से न्यूरोलॉजिकल दर्द से जुड़ी स्थितियों में लिखते हैं।कुछ सामान्य परिस्थितियां जहां इसका उपयोग किया जाता है• माइग्रेन अटैक जिनमें धड़कन जैसा दर्द हो• मितली या उल्टी के साथ सिरदर्द• बार बार होने वाला माइग्रेन जो दैनिक जीवन को प्रभावित करे• साधारण पेनकिलर से ठीक न होने वाला तेज सिरदर्द• तनाव या हार्मोनल बदलाव से होने वाला सिरदर्दनैक्सडॉम 500 टैबलेट का उपयोग आमतौर पर केवल तीव्र दर्द से राहत के लिए किया जाता है, न कि लंबे समय तक रोजाना रोकथाम के लिए, जब तक डॉक्टर विशेष रूप से ऐसा न कहें।सिरदर्द में नैक्सडॉम 500 से राहतसिरदर्द की तीव्रता और कारण अलग अलग हो सकते हैं। कुछ हल्के होते हैं और आसानी से संभाले जा सकते हैं, जबकि कुछ काम, नींद और एकाग्रता को पूरी तरह बाधित कर देते हैं। जब सिरदर्द लगातार या गंभीर हो जाए, तो डॉक्टरसिरदर्द के लिए नैक्सडॉम 500 की सलाह दे सकते हैं।यह दवा खासतौर पर सूजन या रक्त वाहिकाओं से जुड़े सिरदर्द में बेहतर काम करती है। यह दबाव जैसे दर्द को कम करती है, आराम देती है और व्यक्ति को फिर से सामान्य गतिविधियां करने में मदद करती है। हालांकि, इसे नियमित रूप से लेने से पहले सिरदर्द का कारण पहचानना जरूरी है।माइग्रेन मैनेजमेंट में नैक्सडॉम 500माइग्रेन केवल सिरदर्द नहीं होता। इसके साथ मितली, उल्टी, रोशनी और आवाज से परेशानी और अत्यधिक थकान भी हो सकती है। कई मरीज माइग्रेन के दर्द को धड़कन जैसा या एक तरफा बताते हैं।माइग्रेन के लिए नैक्सडॉम 500 इसलिए दी जाती है क्योंकि यह एक साथ कई लक्षणों पर काम करती है। यह दर्द की तीव्रता को कम करती है, कुछ लोगों में मितली को घटाती है और माइग्रेन अटैक की अवधि को छोटा करती है। माइग्रेन के शुरुआती चरण में लेने पर इसके परिणाम अधिक बेहतर देखे जाते हैं।डॉक्टर अक्सर इस दवा के साथ जीवनशैली में बदलाव की भी सलाह देते हैं, जैसे नियमित नींद, पर्याप्त पानी पीना और माइग्रेन को ट्रिगर करने वाले कारणों से बचना।नैक्सडॉम 500 के फायदेसही तरीके से इस्तेमाल करने पर इस दवा के कई लाभ होते हैं।नैक्सडॉम 500 के प्रमुख फायदे इस प्रकार हैं• सूजन से जुड़े दर्द को कम करता है• जब अन्य दर्द निवारक असर न करें तब भी प्रभावी रहता है• दर्द के दौरान जीवन की गुणवत्ता में सुधार करता है• मध्यम से गंभीर सिरदर्द में राहत देता है• माइग्रेन अटैक और उससे जुड़े लक्षणों को नियंत्रित करता हैइन्हीं कारणों से यह दवा डॉक्टरों द्वारा माइग्रेन और तेज सिरदर्द के इलाज में भरोसे के साथ उपयोग की जाती है।नैक्सडॉम 500 की खुराक और सेवन का तरीकानैक्सडॉम 500 की खुराक मरीज की उम्र, दर्द की तीव्रता और मेडिकल इतिहास पर निर्भर करती है। आमतौर पर इसे भोजन के साथ लेने की सलाह दी जाती है ताकि पेट से जुड़ी परेशानी कम हो। कई बार डॉक्टर दर्द शुरू होते ही इसे लेने की सलाह देते हैं, न कि दर्द बढ़ने का इंतजार करने को कहते हैं।बिना डॉक्टर की सलाह के इसकी खुराक या फ्रीक्वेंसी न बढ़ाएं। दर्द की दवाओं का जरूरत से ज्यादा उपयोग सिरदर्द को और बिगाड़ सकता है।किन लोगों को नैक्सडॉम 500 लेते समय सावधानी बरतनी चाहिएयह दवा प्रभावी है, लेकिन सभी के लिए उपयुक्त नहीं हो सकती।विशेष सावधानी की जरूरत होती है अगर आपको• हृदय से जुड़ी समस्या हो• लीवर या किडनी की बीमारी हो• गर्भावस्था या स्तनपान की स्थिति हो• दर्द निवारक दवाओं से एलर्जी हो• पेट में अल्सर या ब्लीडिंग का इतिहास होदवा शुरू करने से पहले अपनी सभी स्वास्थ्य समस्याओं की जानकारी डॉक्टर को जरूर दें।नैक्सडॉम 500 के साइड इफेक्ट्सज्यादातर लोगों में यह दवा सुरक्षित रहती है, लेकिन कुछ मामलों में साइड इफेक्ट्स देखे जा सकते हैं।संभावित साइड इफेक्ट्स में शामिल हैं• हल्की जलन या एसिडिटी• मितली या उल्टी• भारीपन महसूस होना• पेट दर्द• चक्कर या नींद आनाअगर तेज पेट दर्द, काले रंग का मल या एलर्जी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।क्या नैक्सडॉम 500 रोजाना ली जा सकती हैयह माइग्रेन के मरीजों का आम सवाल है।नैक्सडॉम 500 को रोजाना लंबे समय तक लेने की सलाह नहीं दी जाती, जब तक डॉक्टर विशेष रूप से ऐसा न कहें। ज्यादा इस्तेमाल से साइड इफेक्ट्स का खतरा बढ़ सकता है और दवा से होने वाला सिरदर्द भी विकसित हो सकता है।नैक्सडॉम 500 के साथ बेहतर परिणाम पाने के लिए लाइफस्टाइल टिप्सदवा तब बेहतर काम करती है जब उसके साथ सही दिनचर्या अपनाई जाए• पर्याप्त पानी पिएं• समय पर संतुलित भोजन करें• माइग्रेन ट्रिगर्स से बचें• नींद का नियमित पैटर्न बनाए रखें• तनाव कम करने के उपाय अपनाएंमहत्वपूर्ण सुरक्षा सलाहइस दवा के साथ शराब न लें, क्योंकि इससे पेट से जुड़े साइड इफेक्ट्स बढ़ सकते हैं। अगर दवा लेने के बाद चक्कर या नींद आए, तो वाहन न चलाएं। दवा को हमेशा बच्चों की पहुंच से दूर रखें।निष्कर्षनैक्सडॉम 500 टैबलेट गंभीर सिरदर्द और माइग्रेन से परेशान लोगों के लिए एक प्रभावी प्रिस्क्रिप्शन विकल्प है, बशर्ते इसका उपयोग जिम्मेदारी के साथ किया जाए। यह दर्द से राहत देती है, आराम बढ़ाती है और मरीज को फिर से अपनी दिनचर्या पर नियंत्रण पाने में मदद करती है। हालांकि, यह कोई साधारण पेनकिलर नहीं है और इसे हमेशा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लेना चाहिए। इसकी सही जानकारी, फायदे और साइड इफेक्ट्स को समझकर ही सुरक्षित और प्रभावी इलाज संभव है। विस्तृत जानकारी के लिएMedWiki देखें|अक्सर पूछे जाने वाले सवाल1. क्या माइग्रेन के इलाज के लिए Naxdom 500 सुरक्षित है?हाँ, डॉक्टर द्वारा लिखे जाने पर इसे माइग्रेन से राहत के लिए सुरक्षित और प्रभावी माना जाता है।2. Naxdom 500 कितनी जल्दी असर दिखाता है?अधिकतर लोगों को टैबलेट लेने के एक से दो घंटे के भीतर राहत महसूस होने लगती है।3. क्या Naxdom 500 खाली पेट लिया जा सकता है?पेट से जुड़ी परेशानी कम करने के लिए इसे भोजन के साथ लेना बेहतर होता है।4. क्या Naxdom 500 से नींद आती है?कुछ लोगों को इसे लेने के बाद हल्की उनींदापन या चक्कर महसूस हो सकते हैं।5. क्या मैं सामान्य सिरदर्द के लिए Naxdom 500 ले सकता हूँ?यह दवा मुख्य रूप से तेज सिरदर्द या माइग्रेन के लिए दी जाती है। सामान्य सिरदर्द के लिए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।6. क्या Naxdom 500 की आदत लग जाती है?नहीं, यह नशे की दवा नहीं है, लेकिन इसका अधिक इस्तेमाल करने से रिबाउंड हेडेक हो सकता है।7. क्या गर्भावस्था में Naxdom 500 ली जा सकती है?गर्भावस्था में इसे केवल डॉक्टर की स्पष्ट सलाह पर ही लेना चाहिए।
सिरदर्द हमेशा साधारण नहीं होते। कई लोगों के लिए ये बिना किसी चेतावनी के शुरू हो जाते हैं, रोज़मर्रा की दिनचर्या को बिगाड़ देते हैं और धीरे धीरे काम,नींद और मानसिक संतुलन को प्रभावित करने लगते हैं। माइग्रेन अटैक, बार बार होने वाले स्ट्रेस हेडेक और न्यूरोलॉजिकल दर्द अक्सर सिर्फ आराम या घरेलू उपायों से ठीक नहीं होते। ऐसे समय में वासोग्रेन जैसी दवाओं की भूमिका सामने आती है।यह विस्तृत गाइड वासोग्रेन टैबलेट के उपयोग, माइग्रेन और सिरदर्द को मैनेज करने में इसकी भूमिका और डॉक्टर इसे क्यों प्रिस्क्राइब करते हैं, इन सभी बातों को सरल और व्यावहारिक तरीके से समझाती है। यहां जानकारी वास्तविक जीवन के अनुभवों पर आधारित है, बिना बढ़ा चढ़ाकर या कृत्रिम भाषा के।रोज़मर्रा की ज़िंदगी में सिरदर्द और माइग्रेन को समझनाशुरुआत में सिरदर्द सामान्य लग सकता है, लेकिन बार बार होने वाला दर्द कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। माइग्रेन खासतौर पर एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है, जिसमें दिमाग की नसों और रक्त वाहिकाओं में बदलाव होता है। इसके साथमतली, तेज़ रोशनी से परेशानी, आवाज़ से चिढ़ और तेज़ धड़कता हुआ दर्द भी हो सकता है।तनाव से होने वाला सिरदर्द, टेंशन हेडेक और क्रॉनिक माइग्रेन धीरे धीरे एकाग्रता, काम करने की क्षमता और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। जब केवल लाइफस्टाइल बदलाव काफी न हों, तब माइग्रेन रिलीफ टैबलेट की ज़रूरत पड़ती है।वासोग्रेन टैबलेट क्या हैवासोग्रेन टैबलेट एक प्रिस्क्रिप्शन दवा है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से माइग्रेन अटैक और कुछ प्रकार के वैस्कुलर सिरदर्द को कंट्रोल करने के लिए किया जाता है। यह दिमाग में रक्त प्रवाह को प्रभावित करके माइग्रेन से जुड़े दर्द संकेतों को कम करने में मदद करती है।डॉक्टर अक्सर इसे एक पूरी माइग्रेन मैनेजमेंट मेडिसिन योजना के हिस्से के रूप में देते हैं, जिसमें लाइफस्टाइल बदलाव, ट्रिगर कंट्रोल और प्रिवेंटिव केयर शामिल होती है।वासोग्रेन टैबलेट के उपयोग विस्तार सेआइए वासोग्रेन टैबलेट के उपयोग को उन परिस्थितियों में समझते हैं, जिनका सामना लोग वास्तव में करते हैं।1. माइग्रेन के दर्द से राहतवासोग्रेन टैबलेट का सबसे प्रमुख उपयोग माइग्रेन अटैक के दौरान दर्द से राहत देना है। माइग्रेन में अक्सर दिमाग की रक्त वाहिकाएं असामान्य रूप से फैल जाती हैं। वासोग्रेन इस प्रक्रिया को कंट्रोल करने में मदद करती है और दर्द की तीव्रता कम करती है।माइग्रेन रिलीफ टैबलेट के रूप में यह• धड़कते हुए सिरदर्द को कम कर सकती है• रोशनी और आवाज़ के प्रति संवेदनशीलता घटा सकती है• अटैक के दौरान काम करने की क्षमता बेहतर बना सकती हैइसे हमेशा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लेना चाहिए।2. माइग्रेन मैनेजमेंट प्लान में सपोर्टमाइग्रेन का इलाज अक्सर एक ही गोली से नहीं होता। इसके लिए लंबे समय की योजना, ट्रिगर पहचान और प्रिवेंटिव स्ट्रैटेजी ज़रूरी होती है। जिन मरीजों में माइग्रेन बार बार या गंभीर रूप में होता है, उनके लिए वासोग्रेन को माइग्रेन मैनेजमेंट मेडिसिन के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।डॉक्टर इसे तब सुझा सकते हैं• जब माइग्रेन बार बार हो• जब साधारण दर्द निवारक दवाएं असर न करें• जब एक स्ट्रक्चर्ड ट्रीटमेंट प्लान की ज़रूरत होइसी वजह से वासोग्रेन टैबलेट के उपयोग अचानक राहत और नियंत्रित इलाज दोनों में अहम होते हैं।3. वैस्कुलर सिरदर्द में हेडेक कंट्रोलकुछ सिरदर्द दिमाग में रक्त संचार के बदलाव से जुड़े होते हैं। ऐसे मामलों में वैस्कुलर मैकेनिज्म पर काम करने वाली हेडेक कंट्रोल टैबलेट ज़रूरी होती है।वासोग्रेन का उपयोग उन सिरदर्दों में किया जाता है जो• धड़कन वाले हों• बार बार और लंबे समय तक रहें• मतली या चक्कर के साथ होंइन लक्षणों के आधार पर डॉक्टर सही दवा का चुनाव करते हैं।4. स्ट्रेस हेडेक ट्रीटमेंट में सहयोगतनाव से होने वाला सिरदर्द अक्सर सिर के चारों ओर दबाव या कसाव जैसा महसूस होता है। रिलैक्सेशन तकनीकें ज़रूरी हैं, लेकिन बार बार होने पर दवा की मदद भी ली जाती है।वासोग्रेन टैबलेट के उपयोग स्ट्रेस हेडेक ट्रीटमेंट प्लान में तब शामिल किए जाते हैं, जब तनाव माइग्रेन जैसे लक्षणों को ट्रिगर करता है।इस अप्रोच में शामिल होता है• मेडिकल सपोर्ट• तनाव कम करने की तकनीकें• नींद और पानी की आदतों में सुधार5. क्रॉनिक माइग्रेन में सपोर्टक्रॉनिक माइग्रेन में महीने में कई दिनों तक सिरदर्द बना रहता है। यह प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ दोनों को बुरी तरह प्रभावित करता है।ऐसे मामलों मेंवासोग्रेन टैबलेट का उपयोग डॉक्टर की निगरानी में क्रॉनिक माइग्रेन सपोर्ट के लिए किया जाता है। इसका उद्देश्य सिर्फ दर्द कम करना नहीं, बल्कि समय के साथ अटैक की आवृत्ति और तीव्रता को घटाना होता है।मरीजों को अक्सर• कम तीव्र अटैक• रोज़मर्रा के कामों में सुधार• अन्य थेरेपी के बेहतर परिणाम दिखाई देते हैं।6. न्यूरोलॉजिकल दर्द में राहतमाइग्रेन एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है, जिसमें नसों की संवेदनशीलता और सिग्नलिंग बदल जाती है। वासोग्रेन न्यूरोलॉजिकल पेन रिलीफ में मदद करती है क्योंकि यह इन प्रक्रियाओं पर असर डालती है।यह• नर्व से जुड़े दर्द को संतुलित करने• सिरदर्द के दोहराव को कम करने• न्यूरोलॉजिकल आराम बढ़ाने में सहायक हो सकती है।इसी वजह से यह सामान्य पेनकिलर से अलग मानी जाती है।वासोग्रेन टैबलेट शरीर में कैसे काम करती हैदवा कैसे काम करती है, यह समझना उसके सही उपयोग में मदद करता है।वासोग्रेन• माइग्रेन से जुड़े ट्रिगर्स• दिमाग की रक्त वाहिकाओं का व्यवहार• दर्द से जुड़े न्यूरोकेमिकल रास्तों पर असर डालती है।यह माइग्रेन को पूरी तरह ठीक नहीं करती, लेकिन सही इस्तेमाल पर लक्षणों को कंट्रोल करने में मदद करती है।किन लोगों को वासोग्रेन टैबलेट दी जाती हैडॉक्टर आमतौर पर वासोग्रेन टैबलेट के उपयोग पर तब विचार करते हैं, जब मरीज• माइग्रेन से डायग्नोज़ हो• स्ट्रक्चर्ड माइग्रेन केयर की ज़रूरत हो• वैस्कुलर टाइप सिरदर्द से परेशान हो• साधारण दर्द निवारक से राहत न पा रहा होयह बिना सलाह के इस्तेमाल के लिए नहीं है।वासोग्रेन टैबलेट सुरक्षित तरीके से कैसे लेंसुरक्षित उपयोग प्रभाव और साइड इफेक्ट दोनों के लिए ज़रूरी है।सामान्य निर्देश• पानी के साथ लें• केवल तय की गई खुराक लें• खुद से डोज़ न बढ़ाएं• समय से जुड़ी सलाह का पालन करेंनियमितता और डॉक्टर की निगरानी बेहद ज़रूरी है।संभावित साइड इफेक्टहर दवा की तरह वासोग्रेन के भी कुछ साइड इफेक्ट हो सकते हैं।संभावित प्रभाव• थकान• चक्कर आना• हल्की मतली• पेट से जुड़ी परेशानीअधिकांश मामलों में ये हल्के होते हैं, लेकिन लगातार परेशानी होने पर डॉक्टर से संपर्क करें।कब वासोग्रेन से बचना चाहिएकुछ स्थितियों में विशेष सावधानी ज़रूरी होती है।अगर आपको• हृदय संबंधी समस्या• लिवर की बीमारी• दवा से एलर्जी• प्रेगनेंसी या स्तनपान हो, तो डॉक्टर से ज़रूर सलाह लें।वासोग्रेन टैबलेट के उपयोग से पहले मेडिकल हिस्ट्री बताना बहुत ज़रूरी है।दवा के साथ लाइफस्टाइल सपोर्टदवा तभी बेहतर काम करती है, जब उसे सही आदतों के साथ जोड़ा जाए।सहायक आदतें• संतुलित आहार• पर्याप्त पानी• नियमित नींद• तनाव कम करने की तकनीक• माइग्रेन ट्रिगर्स से बचावयह अप्रोच माइग्रेन मैनेजमेंट मेडिसिन के असर को बढ़ाती है।माइग्रेन की दवाओं से जुड़े मिथकमाइग्रेन को लेकर कई गलतफहमियां हैं।आम मिथक• सभी सिरदर्द एक जैसे होते हैं• लंबे समय तक दवा लेना हमेशा नुकसानदायक है• माइग्रेन की दवाएं आदत डाल देती हैं• तेज़ दवा मतलब तुरंत इलाजसही जानकारी जिम्मेदार उपयोग में मदद करती है।डॉक्टर की सलाह क्यों ज़रूरी हैहर व्यक्ति में माइग्रेन अलग होता है। जो एक के लिए काम करे, ज़रूरी नहीं दूसरे के लिए भी करे।डॉक्टर की निगरानी से• सही डायग्नोसिस• उचित डोज़• साइड इफेक्ट की निगरानी• इलाज में ज़रूरी बदलाव संभव हो पाते हैं।यह खासतौर पर क्रॉनिक माइग्रेन सपोर्ट में महत्वपूर्ण है।निष्कर्षसिरदर्द और माइग्रेन केवल अस्थायी परेशानी नहीं हैं, बल्कि जटिल न्यूरोलॉजिकल समस्याएं हैं, जिनके लिए समझदारी भरा इलाज ज़रूरी है। वासोग्रेन टैबलेट के उपयोग को समझने से मरीज इलाज को लेकर भ्रम की बजाय स्पष्टता के साथ आगे बढ़ सकते हैं।डॉक्टर की सलाह के अनुसार इस्तेमाल करने पर वासोग्रेन एक भरोसेमंद माइग्रेन रिलीफ टैबलेट की तरह काम कर सकती है, लंबे समय तक माइग्रेन कंट्रोल में मदद कर सकती है और न्यूरोलॉजिकल दर्द को मैनेज करने में सहायक हो सकती है। सही लाइफस्टाइल और ट्रिगर मैनेजमेंट के साथ यह सिरदर्द के इलाज का संतुलित हिस्सा बनती है, न कि सिर्फ एक त्वरित समाधान। विस्तृत जानकारी के लिएMedWiki देखें|अक्सर पूछे जाने वाले सवाल1. वासोग्रेन टैबलेट का मुख्य उपयोग क्या है?यह मुख्य रूप से माइग्रेन से राहत और वैस्कुलर सिरदर्द के मैनेजमेंट के लिए उपयोग की जाती है।2. क्या वासोग्रेन माइग्रेन रिलीफ टैबलेट है?हां, इसे डॉक्टर की निगरानी में माइग्रेन रिलीफ टैबलेट के रूप में दिया जाता है।3. क्या वासोग्रेन स्ट्रेस हेडेक में मदद करती है?जब तनाव माइग्रेन जैसे लक्षण पैदा करता है, तब यह स्ट्रेस हेडेक ट्रीटमेंट में सहायक हो सकती है।4. क्या वासोग्रेन क्रॉनिक माइग्रेन के लिए ठीक है?डॉक्टर इसे क्रॉनिक माइग्रेन सपोर्ट प्लान के हिस्से के रूप में प्रिस्क्राइब कर सकते हैं।5. वासोग्रेन कितनी जल्दी असर करती है?असर व्यक्ति की स्थिति और दर्द की गंभीरता पर निर्भर करता है।6. क्या वासोग्रेन रोज़ ली जा सकती है?रोज़ाना इस्तेमाल केवल डॉक्टर की सलाह पर ही करना चाहिए।7. क्या वासोग्रेन माइग्रेन को पूरी तरह ठीक कर देती है?नहीं, यह लक्षणों को कंट्रोल करती है, माइग्रेन को स्थायी रूप से ठीक नहीं करती।
नसों से जुड़ा दर्द सामान्य शरीर दर्द से बिल्कुल अलग होता है। यह दर्द अक्सर जलन, झनझनाहट, चुभन, बिजली के झटके जैसा एहसास या लगातार बने रहने वाली तकलीफ के रूप में सामने आता है। कई बार दर्द दिखाई नहीं देता, लेकिन मरीज अंदर से लगातार असहज महसूस करता रहता है। ऐसे दर्द में साधारण पेनकिलर ज़्यादा असर नहीं करते, क्योंकि समस्या मांसपेशियों या हड्डियों में नहीं बल्कि नसों के अंदर होती है।नसों के दर्द से पीड़ित व्यक्ति को न केवल शारीरिक परेशानी होती है, बल्कि मानसिक रूप से भी वह थक जाता है। नींद ठीक से नहीं आती, चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है, काम करने की क्षमता कम हो जाती है और जीवन की गुणवत्ता धीरे धीरे प्रभावित होने लगती है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर ऐसी दवाएं लिखते हैं जो सीधे नर्वस सिस्टम पर काम करें।गैबापिन एनटी 100 ऐसी ही एक दवा है, जिसे नसों से जुड़े दर्द के इलाज में व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता है।यह लेखGabapin NT 100 uses को आसान, व्यावहारिक और वास्तविक भाषा में समझाने के उद्देश्य से लिखा गया है, ताकि आप जान सकें कि यह दवा क्यों दी जाती है, यह शरीर में कैसे काम करती है, किन लोगों को इससे फायदा होता है और इलाज के दौरान किन सावधानियों का पालन करना ज़रूरी है।गैबापिन एनटी 100 क्या है?गैबापिन एनटी 100 एक संयोजन दवा है, जिसे खासतौर पर न्यूरोपैथिक यानी नसों से जुड़े दर्द के इलाज के लिए तैयार किया गया है। इसमें आमतौर पर दो मुख्य दवाएं शामिल होती हैं।पहली दवा Gabapentin होती है, जो नसों की अत्यधिक सक्रियता को नियंत्रित करती है। जब नसें बिना किसी वास्तविक कारण के दर्द के संकेत भेजने लगती हैं, तो Gabapentin उन संकेतों को शांत करने का काम करता है।दूसरी दवा Nortriptyline होती है, जो दिमाग में मौजूद कुछ रसायनों का संतुलन बेहतर बनाती है। ये रसायन दर्द की अनुभूति और मानसिक स्थिति दोनों को प्रभावित करते हैं। जब इनका संतुलन सही होता है, तो दर्द कम महसूस होता है और व्यक्ति मानसिक रूप से भी बेहतर महसूस करता है।इन दोनों दवाओं का संयोजनगैबापिन एनटी 100 को केवल दर्द दबाने वाली दवा नहीं, बल्कि प्रभावी neurological pain management का साधन बनाता है।नसों के दर्द के लिए अलग इलाज क्यों ज़रूरी होता है?नसों का दर्द सूजन या चोट से होने वाले दर्द से अलग होता है। इसमें समस्या नसों के अंदर होती है, जहां से दिमाग तक गलत संकेत पहुंचते हैं। यही कारण है कि सामान्य दर्द निवारक दवाएं, जैसे कि पैरासिटामोल या अन्य पेनकिलर, नसों के दर्द में असरदार साबित नहीं होतीं।नसों के दर्द के आम लक्षणों में शामिल हैं• लगातार झनझनाहट या सुई चुभने जैसा एहसास• जलन या जलता हुआ दर्द• बिजली के झटके जैसा दर्द• हाथों या पैरों में सुन्नपन• रात के समय दर्द का बढ़ जानाइन्हीं कारणों सेGabapin NT 100 uses सामान्य दर्द राहत की बजाय nerve pain treatment पर केंद्रित होते हैं।किन बीमारियों में गैबापिन एनटी 100 का उपयोग किया जाता है?डॉक्टरगैबापिन एनटी 100 को कई नसों से जुड़ी समस्याओं में उपयोग करते हैं।1.डायबिटिक न्यूरोपैथीलंबे समय तकडायबिटीज़ रहने पर हाई ब्लड शुगर नसों को नुकसान पहुंचाती है। इसके कारण पैरों और हाथों में दर्द, झनझनाहट, सुन्नपन और जलन होने लगती है। कई मरीजों को रात में दर्द अधिक महसूस होता है।गैबापिन एनटी 100 इन लक्षणों को कम करने में मदद करता है और चलने फिरने व आराम करने में राहत देता है।2.पोस्ट हर्पेटिक न्यूराल्जियाशिंगल्स संक्रमण के बाद कुछ मरीजों में त्वचा ठीक हो जाने के बावजूद नसों का दर्द लंबे समय तक बना रहता है। यह दर्द काफी तेज़ और परेशान करने वाला हो सकता है।गैबापिन एनटी 100 चिड़चिड़ी नसों को शांत करके इस लगातार दर्द को नियंत्रित करता है।3.सायटिका और नसों पर दबाव से होने वाला दर्दरीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याओं में जब नसों पर दबाव पड़ता है, तो दर्द कमर से पैरों तक फैल सकता है। इसे सायटिका कहा जाता है। ऐसे मामलों में यह दवा abnormal nerve signaling को कम करके राहत देती है।4.झनझनाहट और सुन्नपन का इलाजकई बार नसों की क्षति के कारण लगातार झनझनाहट या सुन्नपन बना रहता है, जिससे रोज़मर्रा के काम करना मुश्किल हो जाता है।गैबापिन एनटी 100 नसों के संकेतों को संतुलित करके इन लक्षणों में सुधार करता है।5.अन्य न्यूरोपैथिक दर्दचोट, संक्रमण, विटामिन बी की कमी या कुछ न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के कारण होने वाले नसों के दर्द में भी डॉक्टर इस दवा की सलाह देते हैं।गैबापिन एनटी 100 शरीर में कैसे काम करता है?Gabapentin नसों की कोशिकाओं से निकलने वाले दर्द संकेतों को नियंत्रित करता है। यह उन रसायनों की मात्रा कम करता है जो दर्द के संकेत दिमाग तक पहुंचाते हैं। इससे नसों की अतिसक्रियता कम होती है।Nortriptyline दिमाग में serotonin और norepinephrine जैसे रसायनों का स्तर बढ़ाता है। ये रसायन दर्द को नियंत्रित करने और मूड को स्थिर रखने में मदद करते हैं।इन दोनों के संयुक्त प्रभाव सेGabapin NT 100 uses नसों के दर्द को शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर नियंत्रित करने में मदद करते हैं।गैबापिन एनटी 100 के प्रमुख फायदेइस दवा के फायदे केवल दर्द कम करने तक सीमित नहीं होते।• जलन और चुभन में कमी• झनझनाहट और सुन्नपन से राहत• नींद की गुणवत्ता में सुधार• रोज़मर्रा की गतिविधियों में आसानी• लंबे समय से चले आ रहे दर्द पर नियंत्रण• मानसिक तनाव और चिड़चिड़ापन कम होनाये सभीGabapin NT 100 benefits इसे लंबे समय तक इस्तेमाल किए जाने वाला भरोसेमंद विकल्प बनाते हैं।असर दिखने में कितना समय लगता है?यह दवा तुरंत असर नहीं दिखाती, क्योंकि नसों को शांत होने में समय लगता है।आमतौर पर• एक सप्ताह में हल्का सुधार• दो से तीन सप्ताह में बेहतर दर्द नियंत्रण• नियमित सेवन से पूरा लाभधैर्य और नियमितताGabapin NT 100 uses के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।खुराक और सेवन का सही तरीकागैबापिन एनटी 100 की खुराक मरीज की उम्र, बीमारी और दर्द की गंभीरता पर निर्भर करती है। डॉक्टर आमतौर पर कम खुराक से शुरुआत करते हैं और जरूरत के अनुसार बढ़ाते हैं।सामान्य निर्देश• रोज़ एक ही समय पर दवा लें• पानी के साथ निगलें• डॉक्टर की सलाह के बिना खुराक न बदलें• दवा अचानक बंद न करेंसंभावित साइड इफेक्टआम तौर पर साइड इफेक्ट हल्के होते हैं।• नींद आना• चक्कर आना• मुंह सूखना• कब्ज• हल्का वजन बढ़नाअगर कोई गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए?• बुज़ुर्ग मरीज• किडनी की समस्या वाले लोग• डिप्रेशन का इतिहास रखने वाले• गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएं• नियमित शराब पीने वाले लोगइलाज के दौरान ज़रूरी सावधानियां• शराब से परहेज करें• नींद या चक्कर आने पर वाहन न चलाएं• संतुलित आहार लें• डायबिटीज़ के मरीज ब्लड शुगर नियंत्रित रखेंनिष्कर्षनसों का दर्द लंबे समय तक रहने वाली और जीवन को प्रभावित करने वाली समस्या हो सकती है। अगर सही इलाज न मिले, तो यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर असर डालती है।गैबापिन एनटी 100 नसों से जुड़े दर्द को नियंत्रित करने में एक प्रभावी दवा है, जो नसों के संकेतों को संतुलित करके राहत देती है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार सही तरीके से उपयोग करने परGabapin NT 100 uses सुरक्षित और असरदार साबित होते हैं और मरीज को बेहतर जीवन जीने में मदद करते हैं। विस्तृत जानकारी के लिएMedWiki देखें|अक्सर पूछे जाने वाले सवाल1. गैबापिन एनटी 100 किन परिस्थितियों में उपयोग किया जाता है?यह मुख्य रूप से नसों के दर्द के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है, जैसे डायबिटिक न्यूरोपैथी, पोस्ट हर्पेटिक न्यूराल्जिया, सायटिका, और झनझनाहट या सुन्नपन का इलाज।2. क्या गैबापिन एनटी 100 दर्द निवारक है?नहीं, यह एक न्यूरोपैथिक दर्द की दवा है जो नसों से आने वाले संकेतों पर काम करती है, और केवल अस्थायी रूप से दर्द को रोकती नहीं है।3. गैबापिन एनटी 100 कितने समय तक लिया जाना चाहिए?इसका समय मरीज की स्थिति और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करता है। कुछ मरीजों को इसे कुछ हफ्तों के लिए लेना पड़ता है, जबकि कुछ को लंबी अवधि के लिए जरूरत होती है।4. क्या गैबापिन एनटी 100 लेने से नींद आती है?हाँ, विशेष रूप से दवा शुरू करने के पहले दिनों में यह हो सकता है क्योंकि शरीर दवा के अनुसार एडजस्ट कर रहा होता है।5. क्या यह लंबे समय तक सुरक्षित है?जब इसे डॉक्टर की सलाह अनुसार लिया जाए और नियमित रूप से निगरानी की जाए, तो इसे लंबे समय तक लेना आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है।6. क्या इस दवा के साथ शराब का सेवन किया जा सकता है?नहीं, शराब से चक्कर आना, नींद आना और सतर्कता में कमी जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।7. क्या गैबापिन एनटी 100 नसों के नुकसान को ठीक कर सकता है?नहीं, यह नसों के नुकसान को ठीक नहीं करता, लेकिन नसों के दर्द और असुविधा को प्रभावी रूप से नियंत्रित करने में मदद करता है।
आज हम जानेंगे 7 ऐसे best foods के बारे में, जो बच्चों के brain health के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं।1. मछली (Fish)मछली बच्चों के दिमाग के लिए एक superfood मानी जाती है। इसमें Omega-3 Fatty Acids होते हैं, जो बच्चों के brain development के लिए बहुत ज़रूरी होते हैं। खासकर DHA और EPA नाम के दो खास compounds होते हैं, जो brain cells को healthy और strong बनाते हैं।आप बच्चों को soft fish जैसे salmon, tuna या रोहू दे सकते हैं।2. BerriesBerries जैसे strawberry, blueberry, raspberry और blackberry में Antioxidants बहुत ज़्यादा होते हैं। ये brain cells को damage होने से बचाते हैं और दिमाग को तेज़ बनाते हैं। इनमें मौजूद Vitamin C और Vitamin K याददाश्त को सुधारने में भी मदद करते हैं!बच्चों को berries खिलाने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि उन्हें milkshake या smoothie में डालें या फिर oatmeal और yogurt के साथ मिलाकर दें। यह खाने में भी मज़ेदार लगता है और सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है।3. अंडे (Eggs)अंडा एक बहुत ही healthy और nutritious food है। इसमें protein, Vitamin B6, B12 और Choline होता है, जो दिमाग को active और तेज़ बनाने में मदद करता है।Choline एक ऐसा nutrient है जो नए brain cells बनाने में मदद करता है और याददाश्त को सुधारता है। अगर बच्चों को focus करने में दिक्कत होती है, तो उन्हें रोज़ एक अंडा जरूर खिलाएं।अंडे को उबालकर, omelette बनाकर या हल्का fry करके दिया जा सकता है।4. Peanut ButterPeanut butter सिर्फ स्वाद में अच्छा नहीं होता, बल्कि यह बच्चों के दिमाग के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। इसमें healthy fats, Vitamin E और Folate होते हैं, जो brain cells को healthy रखते हैं और उनकी growth में मदद करते हैं।Vitamin E एक powerful antioxidant है, जो brain को damage होने से बचाता है और बच्चों की memory को sharp बनाता है।बच्चों को peanut butter whole wheat bread पर लगाकर, smoothie में मिलाकर या फल जैसे सेब और केले के साथ खिलाया जा सकता है।5. BeansBeans यानि कि राजमा, छोले और मूंग बच्चों के brain health के लिए बहुत अच्छे होते हैं। इनमें protein, fiber, iron और zinc भरपूर मात्रा में होते हैं, जो बच्चों के दिमाग को तेज़ और active बनाते हैं।Beans में मौजूद complex carbohydrates दिमाग को धीरे-धीरे और लंबे समय तक energy देते हैं, जिससे बच्चा दिनभर alert और focused रहता है।बीन्स को soup, salad या पराठे की stuffing में मिलाकर खिलाया जा सकता है। आप राजमा चावल या छोले चावल जैसी healthy और tasty dish भी बच्चों को दे सकते हैं।6. Whole GrainsWhole grains जैसे oats, brown rice, quinoa (बथुआ का बीज) और multigrain bread बच्चों के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। इनमें fiber, Vitamin B, iron और glucose होता है, जो बच्चों के brain को दिनभर active रखता है।Glucose बच्चों के दिमाग के लिए energy का सबसे अच्छा source होता है, जिससे बच्चा ज़्यादा focus कर पाता है और उसकी सोचने-समझने की क्षमता बढ़ती है।बच्चों के लिए whole grains को दलिया, multigrain bread sandwich, brown rice पुलाव या oats पराठे के रूप में दिया जा सकता है।7. रंग-बिरंगी सब्ज़ियाँ (Colourful Vegetables)रंग-बिरंगी सब्ज़ियाँ जैसे गाजर, पालक, शिमला मिर्च, टमाटर और broccoli बच्चों के brain health के लिए बहुत ज़रूरी होती हैं। इनमें antioxidants, fiber, Vitamin A, C, K और iron भरपूर मात्रा में होते हैं, जो दिमाग की growth में मदद करते हैं।गाजर में मौजूद Beta-Carotene बच्चों की याददाश्त को तेज़ करता है। पालक और broccoli में iron और folate मौजूद होते हैं, जो brain cells को active रखते हैं और focus बढ़ाते हैं।तो दोस्तों, ये थे 7 superfoods जो बच्चों के दिमाग को तेज़ बनाने में बहुत मदद करते हैं।अब भी Brain Health को लेकर सवाल हैं? Ask Medwiki पर पाएं भरोसेमंद और verified sources से सही जानकारी।Source:- 1. https://ods.od.nih.gov/factsheets/Omega3FattyAcids-HealthProfessional/2. https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC5748761/3. https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC3649719/4. https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/26576343/5. https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC6126094/
क्या आपने कभी Marijuana या Cannabis (गाँजा) का नाम सुना है? शायद सुना ही होगा! तो, चलिए जानते हैं इनके बारे में कुछ important facts!Marijuana और Cannabis (गाँजा) में क्या फर्क होता है?Cannabis (गाँजा) एक प्रकार का पौधा होता है, जिसमें 500 से भी ज्यादा तरह के chemicals मौज़ूद होते हैं। और Marijuana जो कि Cannabis (गाँजा) पौधे का ही एक रूप है, इसमें Tetrahydrocannabinol (THC) नाम का एक खास chemical ज्यादा मात्रा में होता है। यह chemical दिमाग़ पर असर डालकर, लोगों को hallucinations महसूस कराता है!गाँजा दिमाग पर असर कैसे डालता है?THC हमारे शरीर के Anandamide chemical की तरह काम करता है और दिमाग के कुछ ख़ास हिस्सों में मौजूद receptors से जुड़ जाता है। इस वजह से दिमाग ज्यादा active हो जाता है और लोगों पर अलग-अलग तरह के प्रभाव होते हैं!गाँजा के कुछ आम असर इस प्रकार हैं –चीजें ज़रूरत से ज्यादा चमकदार दिखना, खुशबू ज्यादा तेज महसूस होनाMood अचानक बहुत अच्छा या ख़राब हो जानासोचने और समस्या हल करने में दिक्कत होनाबहुत ज्यादा नींद आना या शरीर बहुत relaxed महसूस होनायादश्स्त कमजोर होना / Confusion महसूस करनाचक्कर आनाशरीर का balance बिगड़ जानाकभी-कभी panic attack या घबराहट होनाअगर गाँजा की ज्यादा मात्रा ले ली जाए, तो इसके प्रभाव और भी गंभीर हो सकते हैं, जैसे –Hallucination – यानी ऐसी चीजें दिखना या महसूस होना जो असल में हैं ही नहींDelusion – यानी किसी गलत बात पर बहुत ज्यादा विश्वास कर लेनाइसके अलावा, गाँजा लेने से कुछ और समस्याएं हो सकती हैं, जैसे –मुंह सूखनाजी मिचलाना या उल्टी जैसा महसूस होनादिल की धड़कन तेज हो जानाबहुत ज्यादा भूख लगनाइसलिए गाँजा का सेवन न करें, क्योंकि यह कई समस्याओं का कारण बन सकता है।Source:-1. https://nida.nih.gov/research-topics/cannabis-marijuana2. https://www.nccih.nih.gov/health/cannabis-marijuana-and-cannabinoids-what-you-need-to-know3. https://www.ncbi.nlm.nih.gov/books/NBK425762/4. https://www.webmd.com/mental-health/addiction/marijuana-use-and-its-effects5. https://www.webmd.com/mental-health/addiction/marijuana-abuse
हमारे पिछले वीडियो में हमने Dyslexia के बारे में बात की थी: Dyslexia क्या है, यह कैसे होता है और यह कितना खतरनाक हो सकता है। आज के वीडियो में हम बात करेंगे की Dyslexia को कैसे diagnose किया जा सकता है। Dyslexia से जूझ रहे लोग अक्सर अपनी परेशानी को manage करने के तरीके खोज लेते हैं, इसलिए वो किस परेशानी से जूझ रहे हैं ये कई बार लोग समझ ही नहीं पाते हैं। किसी से भी share न करना शर्मिंदगी से तो बचा सकता है, लेकिन लोगों से बात करके सही मदद मिल जाने पर स्कूल का सफर और पढ़ाई करना आसान हो सकता है।Dyslexia का पता ज़्यादातर तो बचपन में ही लग जाता है लेकिन कई बार Adolescence और adulthood में भी dyslexia का diagnose होता हैं।किसी को adolescent age में Dyslexia है या नहीं, इसका पता इन कुछ लक्षणों से लगाया जा सकता है:समझदार होने के बावजूद भी सही से ना पढ़ (read) पानाSpelling एंड writing skills का कमजोर होनासमय पर assignments और tests ख़त्म ना कर पानाचीजों का सही नाम न याद रख पानाLists और phone numbers याद न रख पानादाएं - बाएं याद रखने में या नक्शा पढ़ने में मुश्किल होनाविदेशी भाषा समझने में परेशानीइनमें से किसी भी एक लक्षण के होने से यह नहीं पता लग सकता की व्यक्ति को Dyslexia की problem है। लेकिन अगर एक व्यक्ति में इनमें से कुछ लक्षण दिखते हैं तो उसका Dyslexia का test करवा लेना चाहिए।स्कूल में या community में कोई psychologist या reading specialist इस condition को evaluate करके formally Dyslexia का पता लगा सकता है।जितनी छोटी उम्र में Dyslexia का पता लग सके उतना ही अच्छा है।हमें उम्मीद है कि ये video आपके लिए informative रहा होगा। Dyslexia जैसी condition को कैसे manage किया जा सकता है.Source:- https://kidshealth.org/en/teens/dyslexia.html
Dyslexia ये word आप सब ने सुना ही होगा और अगर नहीं याद आ रहा तो चलिए याद दिलाते हैं आपको Movie तारे ज़मीन पर के ईशान की। जी हाँ, इस movie में ईशान को जो परेशानी थी उसे ही कहते हैं Dyslexia.सिर्फ movies में ही नहीं, real life में भी Dyslexia एक common problem है। हमारे प्रिय actors Abhishek Bacchan और Hrithik Roshan भी इससे जूझ चुके हैं। आइये जानते हैं इस condition के बारे में थोड़ा और!Dyslexia क्या है?Dyslexia कोई बीमारी नहीं बल्कि एक ऐसी condition है जिसमें व्यक्ति कुछ भी सीखने में सक्षम नहीं होता। इस condition में लोगों को words और numbers को process करने में बहुत मुश्किल होती है, चाहे वो कितने ही बुद्धिमान हों। यह एक ऐसी condition है जो कि व्यक्ति में जन्म से ही होती है। जिन मां बाप को Dyslexia हो उनके बच्चों को भी ये Dyslexia होने संभावना रहती है। Dyslexia वाले लोग मूर्ख या आलसी नहीं होते। ज्यादातर लोग बहुत बुद्धिमान होते हैं और अपनी पढ़ने की समस्याओं को दूर करने के लिए कड़ी मेहनत भी करते हैं।Dyslexia क्यों होता है?लोगों में Dyslexia तब होता है जब उनका brain किसी information को अलग तरह से process करता है। Dyslexia वाले लोगों में पढ़ते समय दिमाग का अलग हिस्सा काम करता है जबकि बाकी लोगों में दिमाग का अलग हिस्सा काम करता है जिसकी वजह से उनके लिए पढ़ाई करना कठिन को जाता है।Dyslexia से जूझ रहे लोगों को alphabets की sounds को समझने और sounds को जोड़कर word बनाने में बहुत मुश्किल होती ही। जिसकी वजह से उनके लिए छोटे शब्दों को पहचानना और बड़े शब्दों को बोल पाना मुश्किल हो जाता है। सिर्फ words को पढ़ने में ही बहुत समय और focus लगता है, इसलिए शब्दों के अर्थ को समझना बहुत मुश्किल हो जाता है और वह पढ़ाई नहीं कर पाते। Dyslexia से जूझ रहे लोगों को words की spelling, लिखने और कभी-कभी बोलने में भी कठिनाई होती है।कितना खतरनाक है Dyslexia?कुछ लोगों में Dyslexia बहुत severe नहीं होता है। Dyslexia अपने आप ठीक तो नहीं होता, लेकिन सही मदद मिलने पर बहुत से लोग Dyslexia के साथ ही पढ़ना सीख जाते हैं। वो चीज़े सीखने के लिए अलग अलग तरीके try करते हैं। Dyslexia वाले लोग जब पढ़ते हैं तो उनका पढ़ने का तरीका slow हो सकता है और साथ ही वह words को mix up भी कर देते हैं इसलिए अगर कोई और उनके लिए उस information को पढ़े तो वह सुनकर बेहतर याद रख सकते हैं। Dyslexia वाले लोगों को Maths की problems solve करने और spellings याद रखने में भी काफी मुश्किल होती है।Source:- https://kidshealth.org/en/teens/dyslexia.html
ASD की screening mainly छोटे बच्चों के लिए की जाती है ताकि पता लगाया जा सके कि बच्चे में ASD के शुरूआती symptoms तो नहीं हैं। हालांकि, adults के लिए भी ASD की screening की जाती है।बच्चों के मामले में, डॉक्टर 2 साल की उम्र से पहले screening के लिए regular check up करते हैं। ASD के symptoms देखने के लिए उन बड़े बच्चों और adults की भी screening की जा सकती है जिनको कभी ASD diagnose ना हुआ हो।ASD की screening के तो तरीके हैं लेकिन screening से ASD diagnose नहीं किया जा सकता। यदि screening से पता चलता है कि बच्चे में disorder होने के chances हैं, तो ASD का diagnosis करने के लिए और tests की ज़रुरत होती है।ASD को लेकर और clarity चाहिए? हमारा trusted health assistant आपकी मदद के लिए Ask Medwiki पर मौजूद है।बच्चों में ASD की screening:ज़्यादातर बच्चों के डॉक्टर या नर्स ही बच्चों में ASD की screening करते हैं।Questionnaires: इस process में parents से questionnaire भरवाया जाता है जिसमें बच्चे के development और behaviour से सम्बंधित उनके speech, movement, thinking, और emotions, के बारे में प्रश्न होते हैं। देखा गया है कि ASD genes में भी होता है, इसलिए उनसे family history से सम्बंधित प्रश्न भी पूछे जाते हैं।Observation: डॉक्टर/नर्स यह observation करते हैं कि बच्चा कैसे खेलता है और कैसे बातचीत करता है। उदाहरण के लिए, वे observe कर सकते हैं कि बच्चा आपके हंसने पर respond करता है या नहीं या फिर किसी दूसरे व्यक्ति के बुलाने पर उनकी तरफ देखता है या नहीं। Respond ना करना ASD का संकेत हो सकता है।Interactive Screening Test: ये test खेलने की activities जैसा है, जैसे गुड़ियों या अन्य खिलौनों के साथ कोई role play करना। ये test बच्चे के communication skills, social behavior, और दूसरी abilities का पता लगाने में मदद करता है।Adults में ASD की Screening:ASD की screening के लिए, psychologist या psychiatrist ये सब कर सकते हैं:आपकी life से जुड़े रोज़ के challanges के बारे में बात करनाSymptoms से related एक questionnaire भरने के लिए कहनाउन परिवार के लोगों से बात करने की सलाह दे सकते हैं जिन्हे याद हो कि आप बचपन में कैसे थेDepression, ADHD या Anxiety के लिए screening test करना, क्यूंकि ASD से जूझ रहे लोगों में ये सब आज कल बहुत ही आम बात है।याद रखें, इस screening के लिए कोई भी तैयारी की ज़रुरत नहीं है और Autism Spectrum Disorder screening से कोई risks भी नहीं हैं।ASD की screening के लिए doctor से consult करना बेहतर होगा। लेकिन यदि आप पहले से ही अपनी condition को थोड़ा समझना चाहते हैं, तो इस link पर click karke और Medwiki के Mental Health calculator का इस्तेमाल करें।Source:- https://medlineplus.gov/lab-tests/autism-spectrum-disorder-asd-screening/
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ब्लूबेरीज़ के फायदे: Antioxidants और Flavonoids आपकी memory और cognitive function को बूस्ट करते है!
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