खांसी को अक्सर एक मामूली समस्या समझ लिया जाता है, लेकिन जो लोग लंबे समय तक चलने वालीखांसी से गुज़रे हैं, वे जानते हैं कि यह कितनी परेशान करने वाली हो सकती है। लगातार खांसी गले में जलन पैदा करती है, छाती की मांसपेशियों पर ज़ोर डालती है, नींद में बाधा डालती है और शरीर की ठीक होने की प्रक्रिया को धीमा कर देती है। जब खांसी सूखी, बार-बार होने वाली और बिना बलगम के होती है, तब डॉक्टर कई बार अल्पकालिक चिकित्सीय समाधान के रूप मेंकॉस्कोपिन सिरप की सलाह देते हैं।कॉस्कोपिन सिरप कोई सामान्य सर्दी-खांसी का सिरप नहीं है। यह एक प्रिस्क्रिप्शन दवा है, जिसका उपयोग विशेष रूप से तब किया जाता है जब खांसी को दबाना (सप्रेस करना) ज़रूरी हो। यह समझना कि यह दवा कैसे काम करती है, किन लोगों के लिए उपयोगी है और इसे लेने से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, सुरक्षित और प्रभावी इलाज के लिए बहुत ज़रूरी है। यह लेख कॉस्कोपिन सिरप के उपयोग, फायदे, दुष्प्रभाव और सुरक्षा से जुड़ी सभी ज़रूरी बातों को सरल भाषा में समझाता है।कॉस्कोपिन सिरप क्या है और डॉक्टर इसे क्यों लिखते हैंकॉस्कोपिन सिरप एक दवा है जिसे आमतौर परसूखी और गैर-उत्पादक (नॉन-प्रोडक्टिव) खांसी के इलाज के लिए डॉक्टर लिखते हैं। उन कफ सिरप्स के विपरीत जो गले को शांत करने या बलगम को पतला करने पर काम करते हैं, यह दवा सीधे तंत्रिका तंत्र पर असर डालकर खांसी को कम करती है।डॉक्टर इसे तब देते हैं जब खांसी शरीर की रक्षा करने के बजाय नुकसान पहुँचाने लगती है। ऐसा अक्सर वायरल इंफेक्शन के बाद, श्वसन संक्रमण से उबरते समय, या प्रदूषण, धुआँ और धूल जैसी चीज़ों के कारण होता है। इन स्थितियों में लगातार खांसी सूजन बढ़ाती है और ठीक होने में देरी करती है। ऐसे समय परकॉस्कोपिन सिरप के उपयोग चिकित्सकीय रूप से महत्वपूर्ण हो जाते हैं।खांसी का रिफ्लेक्स कैसे काम करता हैकॉस्कोपिन सिरप कैसे काम करता है, यह समझने के लिए खांसी के रिफ्लेक्स को समझना ज़रूरी है। खांसी को नियंत्रित करने वाला केंद्र हमारे मस्तिष्क में होता है। जब गला या श्वसन मार्ग किसी उत्तेजक तत्व से प्रभावित होता है, तो संकेत मस्तिष्क तक पहुँचते हैं और खांसी शुरू हो जाती है।बलगम वाली खांसी शरीर के लिए फायदेमंद होती है क्योंकि इससे फेफड़ों से गंदगी और बलगम बाहर निकलता है। लेकिन सूखी खांसी में कोई बलगम नहीं होता। ऐसे में खांसी का रिफ्लेक्स ज़रूरत से ज़्यादा सक्रिय हो जाता है और बार-बार खांसी आती है, जिससे गले में दर्द, जलन और थकान होती है।कॉस्कोपिन सिरप मस्तिष्क में मौजूद खांसी केंद्र की संवेदनशीलता को कम करता है, जिससे बार-बार खांसी आने की इच्छा घट जाती है।कॉस्कोपिन सिरप को एंटीटसिव सिरप क्यों कहा जाता हैकॉस्कोपिन सिरप कोएंटीटसिव सिरप की श्रेणी में रखा जाता है, यानी इसका मुख्य काम खांसी को दबाना होता है। एंटीटसिव दवाओं का उपयोग केवल तब किया जाता है जब खांसी को रोकना फायदेमंद हो।एक एंटीटसिव सिरप के रूप में, कॉस्कोपिन सिरप बलगम को बाहर निकालने में मदद नहीं करता। यह सीधे मस्तिष्क पर असर डालकर खांसी के रिफ्लेक्स को शांत करता है। इसलिए यह सूखी खांसी, वायरल संक्रमण के बाद बची खांसी और गले की जलन से होने वाली खांसी में उपयोगी है।बलगम वाली खांसी में खांसी दबाने से बलगम फेफड़ों में जमा रह सकता है और बीमारी लंबी चल सकती है। यही कारण है किकॉस्कोपिन सिरप हर तरह की खांसी में नहीं दिया जाता।किन स्थितियों में कॉस्कोपिन सिरप का उपयोग किया जाता हैडॉक्टर आमतौर पर निम्न परिस्थितियों में कॉस्कोपिन सिरप लिखते हैं:लगातार सूखी खांसीसर्दी या फ्लू के बाद होने वाली खांसीरात में होने वाली खांसी जिससे नींद खराब होती हैप्रदूषण या धुएँ से होने वाली गले की जलनहल्के श्वसन संक्रमण से उबरते समय बची खांसीइन स्थितियों मेंकॉस्कोपिन सिरप के फायदे स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं, जैसे आराम, बेहतर नींद और रोज़मर्रा की ज़िंदगी में सुधार।कॉस्कोपिन सिरप के मुख्य फायदेसही तरीके से उपयोग करने पर कॉस्कोपिन सिरप कई लाभ देता है:सूखी और परेशान करने वाली खांसी से राहतरात में बेहतर नींदगले और छाती पर कम दबावखांसी पर तेज़ नियंत्रणबीमारी से उबरते समय बेहतर आरामइसी वजह से इसे सही मामलों में एक प्रभावीखांसी से राहत देने वाला सिरप माना जाता है।खुराक और सही तरीकाकॉस्कोपिन सिरप की खुराक उम्र, खांसी की गंभीरता और मरीज की स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करती है। इसे हमेशा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लेना चाहिए। मापने वाले कप से सही मात्रा लेना ज़रूरी है।ज़्यादा मात्रा लेने से जल्दी आराम नहीं मिलता, बल्कि दुष्प्रभाव बढ़ सकते हैं। यह दवा आमतौर पर थोड़े समय के लिए दी जाती है और लंबे समय तक अपने-आप नहीं लेनी चाहिए।कॉस्कोपिन सिरप के दुष्प्रभावकॉस्कोपिन सिरप के दुष्प्रभाव हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। आम दुष्प्रभावों में शामिल हैं:चक्कर आनामुंह सूखनानींद आनाहल्की मतलीनींद आना सबसे आम दुष्प्रभाव है, इसलिए दवा लेने के बाद वाहन चलाने या ध्यान की ज़रूरत वाले काम करने से बचना चाहिए।सावधानियाँ और चेतावनियाँनिम्न लोगों को कॉस्कोपिन सिरप लेते समय विशेष सावधानी रखनी चाहिए:लिवर या किडनी की बीमारी वाले मरीजअस्थमा या पुरानी फेफड़ों की बीमारी वाले लोगबुज़ुर्ग व्यक्तिजिनका नशे से जुड़ा कोई इतिहास रहा होगर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को इसे केवल डॉक्टर की सलाह पर ही लेना चाहिए। शराब के साथ इसका सेवन नहीं करना चाहिए।क्या कॉस्कोपिन सिरप की लत लग सकती हैडॉक्टर की निगरानी में और कम समय के लिए उपयोग करने पर इसकी लत लगने की संभावना कम होती है। गलत इस्तेमाल या लंबे समय तक खुद से दवा लेने पर समस्या हो सकती है।अन्य कफ सिरप से अलग कैसे हैसभी कफ सिरप एक जैसे नहीं होते। कुछ सिरप बलगम निकालने में मदद करते हैं, जबकि कॉस्कोपिन सिरप खांसी के रिफ्लेक्स को दबाता है। गलत खांसी में इसका उपयोग नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए सही जानकारी ज़रूरी है।निष्कर्षकॉस्कोपिन सिरप सूखी, लगातार और परेशान करने वाली खांसी के लिए एक भरोसेमंद दवा है। इसके फायदे तभी मिलते हैं जब इसे सही खांसी में, सही मात्रा में और डॉक्टर की सलाह से लिया जाए। इसके दुष्प्रभावों और सीमाओं को समझना उतना ही ज़रूरी है। सही इस्तेमाल पर, कॉस्कोपिन सिरप खांसी से राहत और जल्दी रिकवरी में मदद करता है। विस्तृत जानकारी के लिएMedWiki देखें|अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न1. क्या कॉस्कोपिन सिरप गीली खांसी के लिए उपयुक्त है?नहीं। कॉस्कोपिन सिरप मुख्य रूप से सूखी और गैर-उत्पादक खांसी के लिए बनाया गया है, जब तक कि डॉक्टर विशेष रूप से गीली खांसी में इसे लेने की सलाह न दें।2. कॉस्कोपिन सिरप कितनी जल्दी असर करता है?अधिकांश लोगों को निर्धारित खुराक लेने के कुछ घंटों के भीतर राहत महसूस होने लगती है।3. क्या कॉस्कोपिन सिरप रोज़ लिया जा सकता है?हाँ, लेकिन केवल उतनी अवधि तक जितनी किसी डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ द्वारा सुझाई गई हो।4. क्या कॉस्कोपिन सिरप से नींद आती है?हाँ। नींद आना (सुस्ती) इसका एक सामान्य दुष्प्रभाव है।5. क्या बच्चे कॉस्कोपिन सिरप ले सकते हैं?सिर्फ तभी जब डॉक्टर द्वारा सही खुराक के साथ इसे लिखकर दिया गया हो।6. क्या कॉस्कोपिन सिरप को अन्य सर्दी-खांसी की दवाओं के साथ लेना सुरक्षित है?कुछ दवाओं के साथ इसकी प्रतिक्रिया हो सकती है। इसलिए किसी भी अन्य दवा के साथ लेने से पहले डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।7. अगर कॉस्कोपिन सिरप की खुराक छूट जाए तो क्या करना चाहिए?जैसे ही याद आए, खुराक ले लें। लेकिन अगर अगली खुराक का समय नज़दीक हो, तो छूटी हुई खुराक को छोड़ दें और दोहरी खुराक न लें।
हम Asthma के symptoms, diagnosis और treatment plan के बारे में बात करेंगे।आइए पहले बात करते है Asthma के symptoms की:Asthma के SymptomsAsthma के अलग-अलग symptoms हो सकते हैं, जैसे:सांस लेने में कठिनाई,खांसी (ज़्यादातर रात को या सुबह सुबह)सांस लेने में संघर्ष करनासांस छोड़ते समय सीटी या घरघराहट की आवाजये symptoms हर रोज़ या कभी-कभी ही दिखाई देते हैं।Asthma Attack क्या होता है:अस्थमा का अटैक तब होता है जब वायुमार्ग (airway) सिकुड़ जाता है, जिससे सांस लेना मुश्किल हो जाता है। Asthma attack के समय, symptoms और भी खराब हो सकते हैं। Attack धीरे-धीरे या अचानक से हो सकते हैं और यहां तक कि life threatening भी हो सकते हैं। जिन लोगों को Asthma की severe problem हो, उन्हें Asthma Attack के chances ज़्यादा होता हैं। अगर बार-बार Asthma attack होता है, तो आपके treatment में adjustment की ज़रुरत पड़ सकती है।Asthma का diagnosis कैसे किया जाता है?डॉक्टर Asthma का पता लगाने के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल करते हैं कि आपको Asthma है या नहीं:Physical Examination और Medical History: आपके symptoms और triggers को समझने के लिए।Lung Function Test:स्पिरोमेट्री (Spirometry ): इस test से यह पता लगता है कि फेफड़े कितनी अच्छी तरह काम कर रहे हैं। इस test को करने के लिए, एक छोटी सी मशीन को एक mouthpiece से जोड़ा जाता है जिससे एक गहरी सांस लेते हैं, सांस को कुछ seconds के लिए रोकते हैं, और फिर mask में जितना हो सके उतना जोर से सांस छोड़ते हैं। यह नापता है कि आप अपने फेफड़ों में कितनी हवा अंदर और बाहर ले जा सकते हैं।Peak Expiratory Flow: इस test के लिए peak flow meter नाम के एक handheld device की ज़रुरत होती है जिससे यह पता लगाया जाता है कि आप maximum effort से कितनी हवा बाहर निकाल सकते हैं।Airway Reaction Test: इस test में, आप अपने airways का reaction देखने के लिए कुछ allergens या दवाओं का सेवन करते हैं। इस test से पहले और बाद में एक spirometry test किया जाता है।Fractional exhaled nitric oxide (FeNO) Test: सांस छोड़ने पर आपकी सांस में Nitric Oxide के स्तर को इस test से नापा जाता है। Nitric Oxide के स्तर का बढ़ा हुआ होने का मतलब हो सकता है कि आपके फेफड़ों में सूजन है।यदि आपको Asthma का पता चलता है, तो आपको treatment plan के लिए अपने डॉक्टर से consult करने की ज़रुरत पड़ेगी।यहाँ Asthma के कुछ treatments options के बारे में बताया गया है।Asthma का इलाज क्या है?Treatment plan में आपके Asthma के symptoms को manage करने और Asthma attack को रोकने के कुछ तरीके होते हैं। जैसे कि :Triggers से बचने की strategies: धुएं या allergy जैसी चीजों से दूर रहना जो आपके Asthma को खराब करते हैं।Quick relief वाली दवाएं: इनमें inhaler या कुछ दवाएं शामिल हैं जो quick relieve provide करती हैं। इन्हें हमेशा अपने पास रखना चाहिए। वे symptoms को रोकने या Asthma attack के समय पर आने वाले symptoms को दूर करने में मदद करते हैं।Control करने वाली दवाएं: ये दवाएं हर दिन ली जाती हैं ताकि symptoms को रोकने में मदद मिल सके। वे airway की सूजन को कम करती हैं और airway को पतला होने से रोकती हैं।Advanced Treatment के options :Bronchial Thermoplasty: Uncontrolled Asthma वाले adults के लिए, डॉक्टर Bronchial Thermoplasty नाम का एक procedure बताते हैं। यह सांस लेना आसान करने के लिए, गर्मी (heat) से फेफड़ों की muscles को सिकोड़ने में मदद करता है। आमतौर पर यह last option होता है और इसमें कुछ risks भी हो सकते हैं। इसलिए, ऐसे tests के बारे में अपने डॉक्टर से विस्तार में चर्चा करें।सुरक्षित रहें, triggers से बचें और अपना treatment plan फॉलो करें।Source:-https://medlineplus.gov/asthma.html
Asthma एक ऐसी फेफड़ों की बीमारी है जिसकी वजह से हमें सांस लेने में काफी तकलीफ होती है। फेफड़े हमारी body का वो हिस्सा हैं जो हमें सांस लेने में मदद करते हैं, और ये बीमारी हमारे फेफड़ों पर ही काफी खराब असर डालती है।अस्थमा होने पर, हमारे airways (नली जो फेफड़ों में हवा ले जाती है और बाहर निकालती है) सूज जाते हैं। इससे सांस लेना मुश्किल हो सकता है और खांसी और घरघराहट हो सकता है।जब ये symptoms और खराब हो जाते हैं, तो उस स्थिति को Asthma Attack कहते हैं।Asthma क्यों होता है?अस्थमा का सही कारण किसी को नहीं पता। लेकिन ज़्यादातर genes और environment को ही Asthma के trigger के रूप में देखा जाता है।कभी-कभी, ये "triggers" Asthma के symptoms को और खराब कर सकते हैंये triggers सभी के लिए अलग अलग हो सकते हैं।Asthma के कुछ प्रकार:Allergic Asthma: धूल, घर में कोई जानवर, घास, पेड़ और कॉकरोच और चूहों की potty, allergy का कारण बनती हैं जिनकी वजह से allergic asthma होता है।Non - Allergic Asthma: ठंडी हवा में सांस लेना, कुछ दवाएं और chemicals, सर्दी और फ्लू के infections, pollution और तंबाकू का धुआं कुछ ऐसे triggers हैं जिनकी वजह से Non - Allergic Asthma का कारण बनते हैं।Exercises की वजह से होने वाला Asthma: कुछ लोगों में exercise Asthma को trigger कर सकता है, खासकर जब हवा dry होती है।काम (व्यवसाय) की वजह से होने वाला Asthma: काम पर chemicals या industrial dust में सांस लेना भी Asthma का कारण बन सकता है।Asthma के triggers हर किसी के लिए अलग अलग हो सकते हैं और समय के साथ बदल भी सकते हैं।अस्थमा होने का सबसे ज्यादा खतरा किसे होता है?हालांकि Asthma बच्चों में काफी common है, लेकिन Asthma किसी भी age में और किसी को भी हो सकता है।कुछ Reasons जो Asthma के risk को बढ़ा सकते हैं:Family History: यदि आपके parents (specially mother) या भाई-बहन को Asthma है, तो आपको Asthma होने का risk काफी बढ़ जाता है।Allergy: जिन लोगों को एलर्जी रहती है उनमें Asthma होने की संभावना ज्यादा होती है।धूम्रपान करना: सिगरेट के धुएं या बाकी किसी धुएं के contact में ज़्यादा रहने से Asthma होने का risk काफी बढ़ जाता है।कुछ चीज़ों के contact में ज़्यादा रहने से: जैसे कि काम पर कुछ chemical irritants या industrial dust।वायु प्रदूषण: जिन जगहों पर Air quality खराब होती है वहां पर Asthma का risk लोगों में बढ़ जाता है।कुछ बीमारियां और कुछ conditions जैसे कि मोटापा और Allergy Asthma के risk को बढ़ाते हैं।Asthma हमारी quality of life पर काफी गलत असर डालता है।अगर आपको या आपके परिवार में किसी को Asthma का संदेह हो, तो सही diagnosis और treatment के लिए अपने डॉक्टर से consult ज़रूर करें। सही medical care और lifestyle change से Asthma को सही तरह से manage किया जा सकता है।Source:-https://medlineplus.gov/asthma.html
World Lung Day हर वर्ष 25 सितम्बर को मनाया जाता है. इसका उद्देश्य lungs की health के बारे में जागरूकता बढ़ाना और lungs की बेहतर देखभाल को बढ़ावा देना है। यह healthy lungs के महत्व पर प्रकाश डालता है और सभी lungs से संबंधित बीमारियों के कारणों और रोकथाम पर ध्यान देता है।Lungs के बारे में और वे क्या करते हैं?Lungs छाती में एक spongy, गुलाबी-ग्रे organ हैं। जब हम सांस लेते हैं, तो हवा हमारे lungs में जाती है और उस हवा से oxygen हमारे blood में जाती है। साथ ही साथ, carbon dioxide blood से lungs में जाता है जो हम सांस के साथ बाहर छोड़ते हैं। हम सभी जानते हैं कि यह प्रक्रिया जीवित रहने के लिए कितनी महत्वपूर्ण है। और अब हम यह भी समझते हैं कि हमारे लिए lungs कितने महत्वपूर्ण हैं।7 आदतें जो lungs की बीमारियों के खतरे को कम करने में मदद कर सकती हैं:यह healthy lifestyle, lungs की बीमारियों को रोकने में मदद करती हैं।1. धूम्रपान न करना: lungs की बीमारियों के जोखिम को कम करने के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण आदतों में से एक है। इसलिए, "धूम्रपान छोड़ें" या "धूम्रपान कभी न शुरू करें"।2. Second hand smoke से बचें: उन जगहों से दूर रहें जहां लोग धूम्रपान कर रहे हैं। यदि कोई परिवार का सदस्य धूम्रपान करता है, तो उन्हें घर या कार के अंदर धूम्रपान करने के लिए मना करें।3. नियमित व्यायाम करें: नियमित व्यायाम आपके lungs को मजबूत बनाता है जो उन्हें और अच्छे से कार्य करने में मदद करता है।वायु प्रदूषण से बचें:4. बाहर निकलते समय: किसी भी प्रकार के व्यायाम में शामिल होने से पहले Air Quality Index (AQI) की जांच करें।5. घर के अंदर: सुनिश्चित करें कि जहां आप रहते हैं और काम करते हैं, वहां के स्थान अच्छी तरह हवादार और साफ हों, ताकि वहां पर एलर्जी, धूल और मोल्ड ना जगह ले पाएं।6. निमोनिया और फ्लू के खिलाफ सावधानी बरतें: हर साल फ्लू शॉट लें। आप अपने डॉक्टर से निमोनिया के टीके के बारे में भी पूछ सकते हैं।7. स्वच्छता बनाए रखें: नियमित अंतराल के बाद अपने हाथों को अच्छी तरह से धोएं और निमोनिया और Bronchitis से पीड़ित लोगों से खुद को दूर रखें।स्वस्थ आहार खाएं: बहुत सारे फल, सब्जियां, साबुत अनाज और प्रोटीन सहित संतुलित आहार का सेवन करें। Antioxidant और Omega -3 fatty acid जैसे पोषक तत्व lungs की बीमारी से बचाते हैं।जागरूक रहें, अपने शरीर का ध्यान रखें और उसे स्वस्थ रखें।Source:- 1.https://www.nhlbi.nih.gov/health/lungs/lung-health 2. https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/chronic-obstructive-pulmonary-disease-(copd)
अदरक:छाती की सूजन को कम करता है।गर्म अदरक की चाय बनाएं, इसे भोजन में शामिल करें, या बस सूखे स्लाइस चबाएं।लहसुन:शक्तिशाली उपचार गुण।ताजा लहसुन खाने से ब्रोंकाइटिस वायरस से लड़ने में मदद मिल सकती है।अगर स्वाद बहुत तेज़ है, तो लहसुन कैप्सूल पर विचार करें।हल्दी:इसमें एंटीवायरल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं।सलाद पर छिड़कें, शहद के साथ मिलाएं, या चाय के रूप में बनाएं।भाप:बलगम साफ़ करने में मदद करता है।गर्म स्नान या गर्म पानी के कटोरे से भाप लें।नमक का पानी:गरारे करने से गले की खराश दूर हो सकती है।गर्म पानी में एक चम्मच नमक मिलाएं, गरारे करें, फिर थूक दें।नींद:आराम से रिकवरी में मदद मिलती है।गहरी नींद प्रतिरक्षा कार्य को बढ़ाती है, सूजन से लड़ने में सहायता करती है।स्वस्थ आदतें:धूम्रपान से बचें, प्रदूषित क्षेत्रों से दूर रहें, स्वस्थ भोजन करें, व्यायाम करें और हाथ की स्वच्छता बनाए रखें।शहद और नींबू:गले की खराश के लिए बढ़िया।शहद के रोगाणुरोधी गुण खांसी की अवधि को कम कर सकते हैं।अतिरिक्त लाभ के लिए चाय में नींबू मिलाएं।अनानास का रस:इसमें ब्रोमेलैन होता है जो सूजन को कम करता है और बलगम को साफ करने में मदद करता है।थाइम:खांसी के लक्षणों में सुधार करने के लिए दिखाया गया है।जड़ी-बूटी का सार सूजन-रोधी और एंटीसेप्टिक लाभ प्रदान करता है।Source:-https://www.healthline.com/health/home-remedies-for-bronchitisDisclaimer:-This information is not a substitute for medical advice. Consult your healthcare provider before making any changes to your treatment. Do not ignore or delay professional medical advice based on anything you have seen or read on Medwiki.Find us at:https://www.instagram.com/medwiki_/?h..https://twitter.com/medwiki_inchttps://www.facebook.com/medwiki.co.in/
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Mrs. Prerna Trivedi
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